देश की खबरें | पंजाब : पीसीएस अधिकारी ‘सामूहिक आकस्मिक अवकाश’ छोड़कर काम पर लौटे
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. अपने सहकर्मी की ‘‘अवैध’’ गिरफ्तारी के विरोध में सामूहिक अवकाश पर गए पंजाब लोक सेवा (पीसीएस) के अधिकारियों ने कठोर कार्रवाई की मुख्यमंत्री भगवंत मान की चेतावनी के बाद बुधवार को सरकार के एक शीर्ष अधिकारी से मुलाकात की और फिर काम पर लौट गये।
चंडीगढ़, 11 जनवरी अपने सहकर्मी की ‘‘अवैध’’ गिरफ्तारी के विरोध में सामूहिक अवकाश पर गए पंजाब लोक सेवा (पीसीएस) के अधिकारियों ने कठोर कार्रवाई की मुख्यमंत्री भगवंत मान की चेतावनी के बाद बुधवार को सरकार के एक शीर्ष अधिकारी से मुलाकात की और फिर काम पर लौट गये।
पीसीएस अधिकारी संघ के प्रतिनिधियों की मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव ए. वेणुप्रसाद के साथ हुई बैठक के बाद सभी अधिकारी ‘सामूहिक आकस्मिक अवकाश’ से काम पर लौट गये।
राज्य सतर्कता ब्यूरो द्वारा लुधियाना में पीसीएस अधिकारी नरिंदर सिंह धालीवाल की "अवैध" गिरफ्तारी के विरोध में पीसीएस अधिकारी सोमवार से पांच दिन के आकस्मिक अवकाश पर चले गए थे।
सामूहिक आकस्मिक अवकाश से राज्य के प्रशासनिक कार्यालयों में सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं, जिससे जनता को असुविधा हुई।
इससे पहले दिन में मुख्यमंत्री मान ने सामूहिक आकस्मिक अवकाश पर गए पीसीएस अधिकारियों को चेतावनी दी थी कि वे दोपहर दो बजे तक ड्यूटी पर लौट आएं, अन्यथा उन्हें निलंबित किया जा सकता है।
धालीवाल की गिरफ्तारी के विरोध में अधिकारियों के सोमवार से सामूहिक आकस्मिक अवकाश पर जाने के कारण राज्य में प्रशासनिक कार्यालयों में सेवाएं प्रभावित होने के बाद मान का यह कड़ा रुख सामने आया था।
मान ने मुख्य सचिव वी के जंजुजा को पत्र लिखकर उन्हें सामूहिक आकस्मिक अवकाश पर गये सभी पीसीएस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था।
मान ने पत्र में लिखा था, ‘‘मेरे संज्ञान में लाया गया है कि कुछ अधिकारी हड़ताल की आड़ में ड्यूटी पर नहीं आ रहे हैं। वे भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ सरकार द्वारा की गई कड़ी कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं।’’
उन्होंने लिखा था, ‘‘यह सभी को स्पष्ट हो जाना चाहिए कि इस सरकार की भ्रष्टाचार को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करने की नीति है। इस तरह की हड़ताल ‘ब्लैकमेलिंग और दबाव डालने’ की श्रेणी में आती है। इसे किसी भी जिम्मेदार सरकार द्वारा बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।’’
मुख्यमंत्री ने कहा था, ‘‘इसलिए आपको हड़ताल को अवैध घोषित करने का निर्देश दिया जाता है। आज यानी 11 जनवरी, 2023 को दोपहर दो बजे तक ड्यूटी पर नहीं आने वाले सभी अधिकारियों को निलंबित किया जाए। जो लोग दोपहर दो बजे तक ड्यूटी पर नहीं आएंगे, उनकी अनुपस्थिति को ड्यूटी से गैर-हाजिर माना जाए।’’
मान के पत्र के बाद मुख्य सचिव जंजुआ ने सभी पीसीएस अधिकारियों को अनधिकृत रूप से ड्यूटी से अनुपस्थित रहने के संबंध में पत्र लिखा।
उन्होंने सभी पीसीएस अधिकारियों को काम पर लौटने का निर्देश देते हुए कहा, “हड़ताल पर या अनधिकृत अवकाश पर गये सभी पीसीएस अधिकारियों को आज अपराह्न दो बजे तक ड्यूटी ज्वाइन करने का निर्देश दिया जाता है, अन्यथा उन्हें निलंबित कर दिया जाएगा, उनकी नौकरी को ‘बाधित सेवा’ की श्रेणी में रखा जाएगा और उनके खिलाफ पंजाब सिविल सेवा (सजा और अपील) नियम, 1970 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
इस बीच, वेणु प्रसाद ने कहा कि अधिकारियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई। किसी के साथ अन्याय नहीं होने का आश्वासन देते हुए उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और संघ भी किसी भ्रष्ट अधिकारी की मदद नहीं करेगा।
यह पता चला है कि अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच और पंजीकरण के मामलों में मानक संचालन प्रक्रिया की पड़ताल के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया जाएगा। धालीवाल के मामले की जांच के लिए एक और कमेटी का गठन किया जाएगा।
अधिकारी संघ के अध्यक्ष रजत ओबेरॉय ने भी कहा था कि वे अपना सामूहिक आकस्मिक अवकाश वापस लेंगे।
सतर्कता ब्यूरो ने बताया था कि लुधियाना में क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकारी के पद पर तैनात धालीवाल को शुक्रवार को सतर्कता ब्यूरो ने ट्रांसपोर्टर्स से रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
पीसीएस अधिकारी संघ ने दावा किया था, ‘‘पीसीएस अधिकारी को अवैध, गलत तथा मनमाने ढंग से और उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना गिरफ्तार किया गया है।’’
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