देश की खबरें | पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने दुष्कर्म के आरोपी को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया
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चंडीगढ़, 11 जून पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने शादी का झूठा वादा कर दुष्कर्म करने के एक आरोपी को जमानत पर रिहा करने का आदेश देते हुए कहा कि आरोपी व्यक्ति तथा शिकायतकर्ता के बीच ‘‘दीर्घकालिक प्रतिबद्धता के बगैर’’ शारीरिक संबंध होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
न्यायमूर्ति विनोद एस. भारद्वाज द्वारा दिए गए जमानत आदेश में कहा गया कि पुरुष तथा महिला दोनों एक ही कंपनी में काम करते थे और याचिकाकर्ता द्वारा रिकॉर्ड पर रखी गई सामग्री से पता चलता है कि दोनों के बीच ‘‘लंबे समय से सौहार्दपूर्ण संबंध’’ थे, लेकिन इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि यह संबंध ‘‘बिना किसी प्रतिबद्धता और बिना किसी शर्त के’’ रहा हो।
गुरुग्राम के बादशाहपुर थाने ने 21 फरवरी को संबंधित व्यक्ति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 69 (कपटपूर्ण तरीकों का इस्तेमाल करके यौन संबंध बनाना) और 351(2) (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया।
यह बात रिकॉर्ड पर लाई गई कि आरोपी व्यक्ति, शिकायतकर्ता महिला का वरिष्ठ अधिकारी था और उनकी मुलाकात अप्रैल 2024 में हुई थी।
याचिकाकर्ता पर आरोप है कि उसने महिला से शादी का वादा करके यौन संबंध बनाने के लिए फुसलाया।
शिकायतकर्ता ने जनवरी में जब कथित तौर पर आरोपी को शादी करने के लिए कहा तो उसने इनकार कर दिया। इसके बाद महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
रिकॉर्ड पर यह तथ्य भी सामने आया कि उनके रिश्ते के दौरान महिला गर्भवती हुई थी तथा तनाव एवं कमजोरी के कारण उसका गर्भपात हो गया था।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने दलील दी कि उनके मुवक्किल पर ‘दुर्भावनापूर्ण’ तरीके से दुष्कर्म का आरोप लगाया गया है। उन्होंने दावा किया कि प्राथमिकी दर्ज होने से पहले 15 जनवरी को महिला की शिकायत पर एक जांच अधिकारी नियुक्त किया गया था।
अधिवक्ता ने दलील दी कि जांच अधिकारी ने दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए, जिसमें पाया गया कि दोनों पिछले 10 महीनों से सहकर्मी एवं अच्छे मित्र थे तथा आपसी सहमति से संबंध में थे एवं महिला पर यौन संबंध स्थापित करने के लिए किसी प्रकार का दबाव नहीं डाला गया था।
अदालत ने अपने आदेश में कहा, ‘‘याचिकाकर्ता ने एक माह और 16 दिन की वास्तविक हिरासत भी काटी है तथा उसका कोई आपराधिक इतिहास भी नहीं है... याचिकाकर्ता को जमानती बॉण्ड भरने एवं मुचलका प्रस्तुत करने की शर्त पर नियमित जमानत पर रहने का आदेश दिया जाता है।’’
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