पुणे, एक जून पुणे पुलिस ने ‘पोर्श’ कार दुर्घटना मामले में नाबालिग आरोपी की मां को गिरफ्तार कर लिया है। उसे आज अदालत में पेश किया जा सकता है। शहर के पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार ने शनिवार को यह जानकारी दी।
नाबालिग की मां को इस बात की पुष्टि होने के बाद गिरफ्तार किया गया कि किशोर के रक्त नमूने उसके रक्त नमूने से बदले गए थे।
पुलिस ने अपनी जांच के तौर पर नाबालिग से उसकी मां की मौजूदगी में उस सुधार गृह में एक घंटे तक पूछताछ की जहां उसे पांच जून तक रखा गया है।
पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार ने दुर्घटना की जांच का हवाला देते हुए बताया कि किशोर के रक्त नमूने उसकी मां के रक्त नमूने से बदले गए थे।
पुलिस ने दो दिन पहले एक स्थानीय अदालत में कहा था कि किशोर के रक्त के नमूने एक महिला के रक्त के नमूने से बदले गए थे।
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) शैलेश बलकवडे ने पुलिस के नाबालिग से पूछताछ करने से पहले कहा, ‘‘हम नाबालिग से उसकी मां की मौजूदगी में सुधार गृह के भीतर पूछताछ करेंगे।’’
किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) ने नाबालिग से पूछताछ करने के लिए शुक्रवार को पुलिस को अनुमति दी थी। किशोर न्याय अधिनियम के तहत किसी नाबालिग से पूछताछ उसके माता-पिता की उपस्थिति में ही की जा सकती है।
पुणे के कल्याणी नगर में 19 मई को ‘पोर्श’ कार के 17 वर्षीय चालक ने मोटरसाइकिल सवार दो सॉफ्टवेयर इंजीनियर को कथित रूप से टक्कर मार दी थी जिससे दोनों की मौत हो गयी थी। पुलिस ने दावा किया कि आरोपी नशे की हालत में कार चला रहा था।
मामले में नाबालिग के पिता एवं रियल एस्टेट कारोबारी विशाल अग्रवाल और दादा सुरेंद्र अग्रवाल को परिवार के वाहन चालक का कथित तौर पर अपहरण करने और उस पर हादसे की जिम्मेदारी लेने का दबाव बनाने के लिए गिरफ्तार किया गया है।
शुक्रवार को एक अदालत ने नाबालिग के पिता और दादा को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। उनकी पुलिस हिरासत की अवधि समाप्त हो गयी थी।
पुलिस ने नाबालिग के रक्त नमूने बदलने के आरोप में ससून जनरल हॉस्पिटल के फॉरेंसिक चिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉ. अजय तावड़े, चिकित्सा अधिकारी डॉ. श्रीहरि हलनोर और कर्मचारी अतुल घाटकाम्बले को गिरफ्तार किया था। पुलिस का आरोप है कि उन्होंने यह दिखाने के लिए रक्त के नमूने बदले कि आरोपी दुर्घटना के वक्त नशे की हालत में नहीं था।
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