देश की खबरें | राज्य स्तर पर अल्पसंख्यक समूहों की पहचान के वास्ते दिशानिर्देशों के लिये न्यायालय में जनहित याचिका

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एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 12 अगस्त राज्य स्तर पर अल्पसंख्यक समूहों की पहचान के लिये दिशा-निर्देश तैयार करने का केन्द्र को निर्देश देने के लिये उच्चतम न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गयी है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अल्पसंख्यकों के लिये बनी योजनाओं का लाभ उनको मिल सकें।

यह जनहित याचिका भाजपा नेता और अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दायर की है। इस याचिका में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान कानून, 2004 की धारा 2(एफ) की वैधता को भी चुनौती दी गयी है।

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याचिका में कहा गया है कि अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान कानून की यह धारा केन्द्र को अनियत्रित अधिकार ही नहीं देती बल्कि यह साफतौर पर मनमानी, अतार्किक और आहत करने वाली है।

अधिवक्ता अश्विनी कुमार दुबे के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि अल्पसंख्यकों के निमित्त बनी योजनाओं के लाभ से ‘असली’ अल्पसंख्यक वंचित रह जाते हैं और इसका लाभ पूरी तरह से बहुमत वाले समूहों को मिल जाता है जो संविधान मे प्रदत्त मौलिक अधिकारों का अतिक्रमण है।

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याचिका में यह घोषित करने और निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि ‘‘यहूदी, बौद्ध और हिन्दू धर्म को मानने वाले, जो लद्दाख, मिजोरम, लक्षद्वीप, कश्मीर, नगालैंड, मेघालय, अरूणाचल प्रदेश, पंजाब और मणिपुर में अल्पसंख्यक है , टीएमए पाई प्रकरण में शीर्ष अदालत की व्यवस्था ओर भावनाओं के अनुरूप अपने शिक्षण संस्थान स्थापित कर सकते हैं और उनका प्रशासन कर सकते हैं।’’

टीएमए पाई फाउण्डेशन प्रकरण में न्यायालय ने व्यवस्था दी थी कि राज्य को यह अधिकार है कि वह राष्ट्र हित में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को बेहतर योग्यता वाले शिक्षक प्रदान करने के लिये नियम बनाये ताकि शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर लक्ष्य हासिल किया जा सके।

याचिका में संविधान के अनुच्छेद 30 का हवाला देते हुये कहा गया है कि धर्म या ई अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद का शिक्षण संस्थान स्थापित करने और उनका प्रशासन करने का अधिकार है।

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