देश की खबरें | अगर मांगें नहीं मानी गईं तो प्रदर्शन तेज किए जाएंगे : लद्दाख के समूह

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के एक दिन बाद बृहस्पतिवार को लद्दाख के समूहों ने पूर्ण राज्य का दर्जा देने और उनके इलाके को संविधान की छठी अनूसूची में शामिल करने की मांग दोहराई। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने उनकी नहीं सुनी तो विरोध प्रदर्शन तेज किए जाएंगे।

नयी दिल्ली, 16 फरवरी दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के एक दिन बाद बृहस्पतिवार को लद्दाख के समूहों ने पूर्ण राज्य का दर्जा देने और उनके इलाके को संविधान की छठी अनूसूची में शामिल करने की मांग दोहराई। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने उनकी नहीं सुनी तो विरोध प्रदर्शन तेज किए जाएंगे।

यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में पर्यावरणविद् और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक ने कहा कि लद्दाख में लोकतंत्र से समझौता किया गया है और स्थानीय लोगों का निर्णय लेने की प्रक्रिया में स्थान नहीं है।

लद्दाख के दो जिलों के सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक समूहों के संयुक्त मंच लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस की ओर से बोलते हुए वांगचुक ने जोर देकर कहा कि संवेदनशील इलाकों के पर्यावरण को बचाने के लिए सुरक्षा उपाय करने और निर्णय प्रक्रिया में स्थानीय लोगों को शामिल करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम केंद्र शासित प्रदेश बनना चाहते थे लेकिन यह बिना विधानसभा का होगा, इसकी कभी कल्पना नहीं की थी। कैसे बजट आवंटित किया जाता है और कैसे राशि खर्च होती है उसमें अब लोगों की भागीदारी नहीं बची है। स्वायत्त पहाड़ी परिषद को भी कमजोर किया गया है और राज्य का दर्जा लद्दाख के लोगों के लिए अति महत्वपूर्ण है।’’

कारगिल के कार्यकर्ता सज्जाद हुसैन ने कहा कि लद्दाख संकट से गुजर रहा है और तत्काल ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘‘लद्दाख संकट से गुजर रहा है...जब अनुच्छेद 370 को हटाया गया था तो दोनों जिलों लेह और कारगिल की अलग-अलग अकांक्षाएं थीं। कारगिल में फैसले का विरोध हो रहा था जबकि लेह में स्वागत किया गया था।’’

हुसैन ने कहा कि प्रशासन को उप राज्यपाल और नौकरशाहों के हवाले कर दिया गया है जो लद्दाख के लोगों के प्रति जवाबदेह नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘‘बेरोजगारी बढ़ रही है। स्नातक और पीएसडी उपाधि धारक सड़क पर हैं। जब हमने अलग लोक सेवा आयोग की मांग की तो सरकार ने कहा कि उसकी इस बारे में कोई योजना नहीं है।’’

हुसैन ने कहा, ‘‘ लोगों को पूरी तरह से शक्तिविहीन कर दिया गया है, हमारा कोई प्रतिनिधित्व नहीं है...पहले जम्मू-कश्मीर विधानसभा में हमारे चार विधायक होते थें जो सदन में क्षेत्र की समस्याओं को रखते थे।’’

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