जरुरी जानकारी | निजी क्षेत्र को केंद्रीय उपक्रमों में निवेश के अवसरों पर गौर करना चाहिए: दीपम सचिव
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) के सचिव तुहिन कांत पांडेय ने बुधवार को निजी क्षेत्र से निजीकरण के लिये प्रस्तावित केंद्रीय लोक उपक्रमों में निवेश के अवसर टटोलने को कहा। उन्होंने कहा कि विनिवेश को सुधारों के नजरिये से देखा जाना चाहिए न कि राजकोषीय प्रबंध के हिसाब से।
नयी दिल्ली, 14 सितंबर निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) के सचिव तुहिन कांत पांडेय ने बुधवार को निजी क्षेत्र से निजीकरण के लिये प्रस्तावित केंद्रीय लोक उपक्रमों में निवेश के अवसर टटोलने को कहा। उन्होंने कहा कि विनिवेश को सुधारों के नजरिये से देखा जाना चाहिए न कि राजकोषीय प्रबंध के हिसाब से।
पांडेय ने कहा कि केंद्रीय लोक उपक्रमों (सीपीएसई) का प्रदर्शन कंपनी संचालन गतिविधियों से सुधरा है और उनके शेयर मानक शेयर बाजार सूचकांकों के मुकाबले शेयरधारकों को बेहतर रिटर्न दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियां देश और विदेश दोनों में जटिल व्यवसायों का प्रबंधन कर रही हैं। निजी कंपनियों को पुरानी परियोजना के अधिग्रहण के रूप में केंद्रीय लोक उपक्रमों में निवेश पर ध्यान देने की जरूरत है जो बढ़े हुए उत्पादन और रोजगार सृजन को लेकर लाभ देगा।
पांडेय ने कहा, ‘‘इसीलिए, अर्थव्यवस्था के मौजूदा संदर्भ में अगर हम पूंजी निर्माण, वृद्धि के लिये जाते हैं और इस दशक को भारत के दशक के रूप में देखते हैं, हमें अब हमें निवेश के अवसरों को खोलना होगा। और निवेश के अवसरों में से एक पुरानी परियोजना में निवेश है।’’
उल्लेखनीय है कि एक दिन पहले ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उद्योग जगत से झिझक छोड़ने और अपनी क्षमता पर संदेह किये बिना निर्णय लेने कहा था।
दीपम ने रणनीतिक बिक्री के लिये आधा दर्जन से अधिक कंपनियों को चयन किया है। इनमें बीईएमएल, शिपिंग कॉर्प, कॉनकॉर (कंटेनर कॉरपोरेशन), विजाग स्टील, आईडीबीआई बैंक, एनएमडीसी का नगरनार स्टील प्लांट और एचएलएल लाइफकेयर शामिल हैं।
सचिव ने एयर इंडिया और एनआईएनएल के निजीकरण और उनमें हुए सकारात्मक बदलाव का उदाहरण देते हुए कहा कि निजी क्षेत्र दक्षता, निर्णय लेने और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अधिक तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें स्पष्ट रूप से विनिवेश को राजकोषीय नजरिये के बजाय सुधारों के दृष्टिकोण से देखना चाहिए जो इसके जरिये आ सकता है।’’
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