देश की खबरें | प्रधानमंत्री मोदी कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन को संबोधित करेंगे

नयी दिल्ली, तीन अक्टूबर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार को कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में भाग लेंगे। यह सम्मेलन हरित परिवर्तन के लिए वित्तपोषण, भू-आर्थिक विखंडन और विकास के लिए लचीलापन बनाए रखने के लिए नीतिगत कार्रवाई के सिद्धांतों जैसे विषयों पर केंद्रित होगा।

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने बृहस्पतिवार को एक बयान में यह जानकारी दी। कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन का यह तीसरा संस्करण है जो छह अक्टूबर को समाप्त होगा।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री उपस्थित लोगों को संबोधित भी करेंगे।

भारतीय एवं अंतरराष्ट्रीय विद्वान तथा नीति निर्माता भारतीय अर्थव्यवस्था और ‘ग्लोबल साउथ’ की अर्थव्यवस्थाओं से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करेंगे। सम्मेलन में दुनिया भर के वक्ता भाग लेंगे। ‘ग्लोबल साउथ’ शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर आर्थिक रूप से कम विकसित देशों को संदर्भित करने के लिए किया जाता है।

सम्मेलन में ‘भारत और मध्यम आय वर्ग’, नौकरियां और कौशल विकास, कृत्रिम मेधा और सार्वजनिक नीति डिजाइन के साथ अर्थव्यवस्था के लचीलेपन को बनाए रखने के लिए नीतिगत कार्रवाई के सिद्धांतों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन का आयोजन वित्त मंत्रालय के साथ साझेदारी में आर्थिक विकास संस्थान द्वारा किया जा रहा है।

वित्त मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है कि ‘द इंडियन एरा’ (भारत का युग) के मुख्य विषय पर आधारित यह सम्मेलन 150 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शिक्षाविदों और नीति निर्माताओं को एक साथ लाएगा ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था और ग्लोबल साउथ की अर्थव्यवस्थाओं के सामने आने वाले सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जा सके।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण उद्घाटन भाषण देंगी, जबकि विदेश मंत्री एस. जयशंकर 4-6 अक्टूबर से होने वाले तीन दिवसीय कार्यक्रम का समापन भाषण देंगे।

इन सत्रों में कुछ चर्चाएं इस बात पर होंगी कि भारतीय अर्थव्यवस्था कैसे अधिक नियमित रोजगार पैदा कर सकती है, नियम-आधारित बहुपक्षीय प्रणाली को भू-आर्थिक विखंडन को रोकने के लिए कैसे अनुकूलित करना चाहिए और बहुपक्षीय सहमति के माध्यम से प्रगति को कैसे संभव बनाया जा सकता है।

सम्मेलन के तीसरे संस्करण में रोजगार सृजन के लिए कृत्रिम बुद्धिमता, मशीन लर्निंग और फिनटेक में भारत के तुलनात्मक लाभ का उपयोग और भारत के वर्तमान विकास की गति का आकलन कर उन तरीकों पर विचार करना जिनसे भारत उत्पादकता वृद्धि को बनाए रख सकता है, पर भी चर्चा होगी।

इसमें वित्तीय प्रणाली को अधिक लचीला और कुशल बनाने के लिए आवश्यक सुधारों पर भी चर्चा की जाएगी। साथ ही सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए दीर्घकालिक पहलों की पहचान करना और जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा पर चर्चा भी शामिल होगी।

वित्त मंत्रालय ने कहा, ‘‘सम्मेलन ग्लोबल साउथ में देशों के सेतु-निर्माता के रूप में भारत की बढ़ती भूमिका को प्रदर्शित करेगा।’’

सम्मेलन के वक्ताओं में भूटान के वित्त मंत्री ल्योंपो लेकी दोरजी, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी के मिश्रा, एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) के मुख्य अर्थशास्त्री एरिक बर्गलोफ, नीति आयोग की उपाध्यक्ष सुमन बेरी, 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगड़िया और हार्वर्ड केनेडी स्कूल में अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश के प्रोफेसर रॉबर्ट लॉरेंस शामिल हैं।

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