जरुरी जानकारी | वास्तविक कर्ज दर बढ़ने से रिजर्व बैंक पर रेपो दर में कटौती का दबाव: रिपोर्ट

मुंबई, तीन अगस्त रिजर्व बैंक द्वारा इस साल फरवरी से नीतिगत ब्याज दर में कुल मिलाकर प्रतिशत 1.35 अंक और बैकों की कर्ज की मानक दरों में इसी दौरान प्रतिशत 1.05 अंक की कमी के बावजूद कारोबारियों के लिए कर्ज की वास्तविक वास्तविक ब्याज दर में 0.44 प्रतिशत की वृद्धि ही हुई है।

बैंक आफ अमेरिका (बोफा) सिक्युरिटीज इंडिया के अर्थशास्त्री के अनुसार कर्ज की वास्तविक ब्याज दर ही रिण प्रवाह में तेजी से आती गिरावट का मुख्य कारण है। यह कोरोना वायरस महामारी के कारण एक तरह से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में बड़ी गिरावट की तरफ भी इशारा करता है।

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उसके मुताबिक, ‘‘मध्य मई में पहली बार लॉकडाउन उठने के बाद से अर्थव्यवस्था में रिण प्रवाह में 1.06 प्रतिशत की गिरावट रही है। निम्न रिण मांग और ऊंची वास्तविक ब्याज दर ही अर्थव्यवस्था में सुधार के आड़े आ रही है।

ब्रोकरेज कंपनी के मुताबिक अर्थव्यवस्था में मुद्रा प्रसार की वृद्धि से यह गुंजाइश बनी है कि कर्ज की ब्याज दरों को मार्च से पहले जहां थी उससे एक प्रतिशत अधिक कटौती की जाये।

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बोफा अर्थशास्त्री के मुताबिक ऊंची रिण दरों को मूल थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) के साथ समायोजन के बाद भी अर्थव्यवस्था में सुधार को महामारी के प्रभाव से पहले की स्थिति में जाने से रोक रही है। जहां एक तरफ मार्च 2019 के बाद से रिजर्व बैंक की नरमी से सीमांत लागत आधारित रिण की दर (एमसीएलआर) 1.05 प्रतिशत नीचे आई है वहीं वास्तविक एमसीएलआर 0.44 प्रतिशत बढ़ी है। इस दौरान मूल डब्ल्यूपीआई मुद्रास्फीति मार्च 2019 के 2.3 प्रतिशत से गिरकर जून में 0.8 प्रतिशत पर आई है।

उनका कहना है कि, ‘‘मार्च 2019 से इसी प्रकार भारित औसत ब्याज दर (डब्ल्यूएएलआर) में मई में 0.37 प्रतिशत की कमी आई है जबकि दूसरी वास्तविक डब्ल्यूएएलआर 1.47 प्रतिशत बढ़ गया।’’ उनके मुताबिक कर्ज के उठाव में गिरावट का यही एक बड़ा कारण है।

इस ब्रोकरेज कंपनी ने पिछले महीने चालू वित्त वर्ष के दौरान जीडीपी में 5 से लेकर 7.5 प्रतिशत गिरावट का अनुमान व्यक्त किया है। उसका कहना है कि लॉकडाउन में बीता हर महीना अर्थव्यवस्था में एक प्रतिशत की गिरावट लायेगा।

अप्रैल के अंत से रिण उठाव में 50,800 करोड़ रुपये की कमी आई है जबकि पिछले साल इस दौरान इसमं 44,600 करोड़ रुपये का कर्ज उठाया गया। वहीं मई अंत से इसमें 2,500 करोड़ की गिरावट आई जबकि एक साल पहले इस दौरान 42,300 करोड़ रुपये का कर्ज उठाव हुआ।

रिण दर में कटौती के अलावा रिजर्वबैंक 105 अरब डालर का खुला बाजार परिचालन (ओएमओ) की घोषणा कर सकता है। इससे एक तरफ बैंकों को उनकी ब्याज दरें कम करने में मदद मिलेगी जबकि दूसरी तरफ वित्त मंत्रालय सरकारी बैंकों में पूंजी डालने की घोषणा कर सकती है। यह पूनर्पूंजीकरण बांड के जरिये या फिर रिजर्व बैंक के आरक्षित कोष के पुनर्मूल्यांकन के जरिये किया जा सकता है।

रिजर्व बैंक के नवीनतम आंकडे बताते हैं कि बैंक रिण वृद्धि 17 जुलाई को धीमी पड़कर 5.9 प्रतिशत रह गई जो कि फरवरी में 7 प्रतिशत और पिछले साल 12.2 प्रतिशत पर थी।

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