देश की खबरें | राष्ट्रपति राजनीतिक मतभेदों से ऊपर, अभिभाषण का बहिष्कार ‘दुर्भाग्यपूर्ण’: भाजपा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भाजपा ने शुक्रवार को नये कृषि कानूनों के विरोध में संसद के बजट सत्र के पहले दिन दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण का बहिष्कार करने के लिए विपक्षी दलों को आड़े हाथों लेते हुए उनके रवैये को ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण’’ करार दिया और कहा कि वह देश के संवैधानिक मुखिया हैं और राजनीतिक मतभेदों से ऊपर हैं।
नयी दिल्ली, 29 जनवरी भाजपा ने शुक्रवार को नये कृषि कानूनों के विरोध में संसद के बजट सत्र के पहले दिन दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण का बहिष्कार करने के लिए विपक्षी दलों को आड़े हाथों लेते हुए उनके रवैये को ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण’’ करार दिया और कहा कि वह देश के संवैधानिक मुखिया हैं और राजनीतिक मतभेदों से ऊपर हैं।
उल्लेखनीय है कि किसानों के आंदोलन के मुद्दे को लेकर कांग्रेस समेत 20 से अधिक पार्टियों ने संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार किया।
भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उसका ‘‘अहंकार’’ ही उसकी ‘‘वास्तविक समस्या’’ है क्योंकि उसे लगता है कि जनादेश पक्ष में ना होने के बावजूद शासन करना उसका अधिकार है।
उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों ने संसदीय परंपराओं का उल्लंघन किया और कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के दौरान तमाम ‘‘घोटालों’’ के बावजूद भाजपा ने कभी राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार नहीं किया।
कांग्रेस पर हमला जारी रखते हुए उन्होंने कहा कि 26 जनवरी को किसानों द्वारा टैक्टर परेड के नाम पर राजधानी दिल्ली में की गई हिंसा की उसने अभी तक निंदा नहीं की है।
प्रसाद ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘बजट सत्र की शुरुआत आज राष्ट्रपति के अभिभाषण से हुई। राष्ट्रपति राजनीतिक मतभेदों से ऊपर होते हैं और वे भारत के संवैधानिक मुखिया होते हैं। इसलिए वह हमारे सम्मान के हकदार हैं।’’
उन्होंने कहा कि यह बहुत खेद का विषय है कि विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार किया। उन्होंने कहा कि जिस कांग्रेस ने इस देश पर वर्षों शासन किया उसका रवैया तो सबसे ज्यादा गैर जिम्मेदाराना रहा।
केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी कांग्रेस को आड़े हाथों लिया और आरोप लगाया कि उसका अस्तित्व पिछले पांच-छह सालों में इस ‘‘झूठ’’ को फैलाने पर आधारित रहा कि मोदी सरकार संवैधानिक मूल्यों खिलाफ है।
उन्होंने कहा कि उसी कांग्रेस ने आज राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार किया।
उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘‘कांग्रेस का पाखंड आज फिर उजागर हो गया।’’
प्रसान ने राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान कांग्रेस सांसद रवनीत सिंह बिट्टू के रवैये को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। बिट्टू संसद के केंद्रीय कक्ष पहुंचे और विवादों में घिरे तीन नये कृषि कानूनों के खिलाफ नारेबाजी की।
कांग्रेस के अलावा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, नेशनल कांफ्रेंस, द्रमुक, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना, सपा, राजद, माकपा, भाकपा, आईयूएमएल, आरएसपी, पीडीपी, एमडीएमके, केरल कांग्रेस(एम) और एआईयूडीएफ ने राष्ट्रपति अभिभाषण का बहिष्कार किया। बाद में आम आदमी पार्टी, शिरोमणि अकाली दल, जनता दल (एस) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने भी दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में शामिल नहीं होने का फैसला किया।
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