देश की खबरें | ‘एहतियाती हिरासत कठोर’: न्यायालय ने दो लोगों के खिलाफ नगालैंड सरकार के आदेश को खारिज किया

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नयी दिल्ली, पांच मार्च उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को निवारक हिरासत को एक “कठोर उपाय” करार देते हुए मादक पदार्थ से जुड़े मामले में पकड़े गए दो लोगों के खिलाफ जारी हिरासत आदेश को निर्धारित सुरक्षा उपायों के अभाव में रद्द कर दिया।

न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने प्राधिकारियों द्वारा बिना किसी विवेक का प्रयोग किए हिरासत में रखने के “कूट आदेशों” को गलत पाया।

परिणामस्वरूप पीठ ने स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम, 1988 की धारा 3 (1) के तहत अशरफ हुसैन चौधरी और उसकी पत्नी अदालियू चावांग के हिरासत आदेशों के खिलाफ याचिका को खारिज करने के गुवाहाटी उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द कर दिया।

पीठ ने कहा, “निवारक हिरासत एक कठोर उपाय है, जिसके तहत किसी ऐसे व्यक्ति को, जिस पर किसी दंडात्मक कानून के तहत मुकदमा नहीं चलाया गया हो और जिसका दोषसिद्ध नहीं किया गया हो, एक निश्चित अवधि के लिए निरुद्ध रखा जा सकता है, ताकि उस व्यक्ति की प्रत्याशित आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सके।”

हालांकि, संविधान के अनुच्छेद 22(3)(बी) के तहत निवारक हिरासत को मंजूरी दी गई है, लेकिन अनुच्छेद 22 में निवारक हिरासत को लागू करते समय पालन किए जाने वाले कड़े मानदंड भी दिए गए हैं।

पीठ ने कहा कि अनुच्छेद 22 में संसद द्वारा निवारक हिरासत से संबंधित शर्तों और तौर-तरीकों को निर्धारित करने के लिए कानून बनाने की बात कही गई है।

उसने कहा, “हम मानते हैं कि गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने विवादित हिरासत आदेशों की वैधता का परीक्षण करते समय स्थापित कानूनी मानदंडों को लागू करने में गलती की है। तदनुसार, गुवाहाटी उच्च न्यायालय द्वारा 29 अगस्त 2024 को पारित सामान्य निर्णय, जिसमें दोनों रिट याचिकाओं को खारिज किया गया था, को अलग रखा जाता है और अपीलों को अनुमति दी जाती है।”

पीठ ने नगालैंड सरकार के गृह विभाग के विशेष सचिव द्वारा पारित और बढ़ाए गए 30 मई 2024 के नजरबंदी आदेशों को रद्द कर दिया।

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