ताजा खबरें | पॉक्सो कानून : राज्यसभा में सदस्यों ने ‘‘पीड़ित केंद्रित’’ सुधारों की जरूरत पर दिया बल

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. राज्यसभा में शुक्रवार को विभिन्न दलों के सदस्यों ने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) कानून के प्रभावी कार्यान्वयन और ‘‘पीड़ित केंद्रित’’ सुधारों की जरूरत पर बल दिया।

नयी दिल्ली, सात फरवरी राज्यसभा में शुक्रवार को विभिन्न दलों के सदस्यों ने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) कानून के प्रभावी कार्यान्वयन और ‘‘पीड़ित केंद्रित’’ सुधारों की जरूरत पर बल दिया।

उच्च सदन में सदस्य राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) सदस्य फौजिया खान के निजी विधेयक ‘‘लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2024’’ पर हुई चर्चा में भाग ले रहे थे।

फौजिया खान ने अपना निजी विधेयक पेश करते हुए बच्चों के साथ यौन अपराध करने वाले दोषियों को सख्त सजा दिए जाने की मांग की।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार, 2017 से छह साल में पॉक्सो मामलों में करीब 94 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

खान ने कहा, ‘‘लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2024 का उद्देश्य पीड़ित-केंद्रित सुधारों को लागू कर विभिन्न चुनौतियों का समाधान करना है। इस विधेयक के मुख्य उद्देश्यों में पीड़ितों को मुआवज़ा देने में अस्पष्टता को दूर करना; देरी को रोकने के लिए स्पष्ट मुआवज़ा प्रक्रिया शुरू करना; प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए शैक्षणिक संस्थानों और बाल देखभाल कर्मियों सहित हितधारकों के लिए प्रशिक्षण अनिवार्य करना शामिल हैं।’’

प्रस्तावित विधेयक के तहत, पुलिस या विशेष किशोर पुलिस इकाई को मामला दर्ज होने के 24 घंटे के भीतर बच्चे को बाल कल्याण समिति के सामने पेश करना होगा और मामले की जानकारी विशेष अदालत को या विशेष अदालत के अनुपलब्ध होने पर सत्र अदालत को देनी होगी।

उन्होंने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है क्योंकि पहले कोई विशिष्ट समयसीमा नहीं थी।

खान ने कहा कि प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट प्रक्रिया स्थापित करना है कि यौन अपराधों के पीड़ितों, विशेष रूप से नाबालिगों को प्रक्रियागत देरी के बिना समय पर मुआवज़ा मिले।

विधेयक पर हुई चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस सदस्य जयराम रमेश ने कहा कि दिसंबर 2019 में, राज्यसभा में इसी मुद्दे पर चर्चा हुई थी और तत्कालीन सभापति वेंकैया नायडू ने सोशल मीडिया, बाल पोर्नोग्राफी और ऑनलाइन यौन शोषण के मुद्दों पर विचार करने के लिए सदस्यों की एक समिति गठित की थी।

रमेश ने कहा, ‘‘25 जनवरी 2020 को, उस समिति ने ‘सोशल मीडिया पर पोर्नोग्राफी का बच्चों और समाज पर प्रभाव’ शीर्षक से अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।’’

उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में पांच सिफारिश की गई थीं, जिनमें पॉक्सो, 2012 में आवश्यक विधायी बदलाव; तकनीकी; और इस मुद्दे से निपटने के लिए आवश्यक संस्थागत उपाय और जागरूकता अभियान शामिल हैं।

भाजपा के राधामोहन दास अग्रवाल ने कहा कि बड़ी संख्या में ऐसे अपराध पीड़ित के घर में परिवार के सदस्यों द्वारा किए जाते हैं। उन्होंने इस मुद्दे पर जागरूकता का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षा और निजी व सरकारी सेवा प्रणाली द्वारा मनोवैज्ञानिक विश्लेषण का कोई प्रावधान नहीं है।

चर्चा में भाजपा के सुधांशु त्रिवेदी, आम आदमी पार्टी के संजीव अरोड़ा, राष्ट्रीय जनता दल के संजय यादव ने भी भाग लिया। चर्चा अधूरी रही।

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