देश की खबरें | पीएलएफआई आतंकी वित्तपोषण मामला : झारखंड से बड़ी मात्रा में विस्फोटक व हथियार जब्त किए गए

नयी दिल्ली, 31 मई राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने बुधवार को कहा कि उसने पिछले दो दिन में पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएलएफआई) से जुड़े आतंकी वित्तपोषण मामले में झारखंड से बड़ी मात्रा में विस्फोटक, हथियार और गोला-बारूद जब्त किए हैं।

एजेंसी के एक प्रवक्ता ने कहा कि ये छापे झारखंड पुलिस के सहयोग से मारे गए।

पीएलएफआई के स्वयंभू प्रमुख दिनेश गोप द्वारा इस बारे में खुलासा किये जाने के बाद सोमवार और मंगलवार को झारखंड के खूंटी, गुमला और सिमडेगा जिलों में बरामदगी की गई। गोप को 21 मई को गिरफ्तार किया गया था।

प्रवक्ता ने बताया कि एनआईए और झारखंड पुलिस ने सोमवार को खूंटी के रनिया थाना क्षेत्र के तहत झरियाटोली से करीब 62.3 किलोग्राम जिलेटिन और 732 कारतूस बरामद किए।

उन्होंने बताया कि उसी दिन गुमला के कामदारा इलाके के किसनी गांव से एक पिस्तौल के साथ कई कारतूस बरामद किए गए। इसके बाद मंगलवार को सिमडेगा के महाबुआंग थाना क्षेत्र के तहत महुआटोली की पहाड़ी से दो आईईडी बरामद किए गए।

एक हफ्ते से भी कम समय में यह तीसरी बरामदगी थी। एनआईए के अनुसार गोप की गिरफ्तारी के बाद मामले में लगातार जांच के परिणामस्वरूप 26 मई को भी भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किए गए थे।

इससे पहले, एनआईए ने झारखंड के खूंटी जिले के गोप उर्फ कुलदीप यादव के खिलाफ प्रतिबंधित माओवादी संगठन पीएलएफआई के सदस्यों से 25.38 लाख रुपये के पुराने नोटों की बरामदगी के मामले में आरोप पत्र दायर किया था।

गोप लंबे समय से फरार था और 21 मई को एनआईए ने उसे पकड़ लिया। 22 मई को, एक विशेष अदालत ने उसे एनआईए की हिरासत में भेज दिया।

झारखंड सरकार द्वारा घोषित 25 लाख रुपये के इनाम के अलावा एनआईए ने गोप के बारे में सूचना देने वालों के लिए पांच लाख रुपये का इनाम घोषित किया था।

एनआईए की जांच के अनुसार गोप कारोबारियों, ठेकेदारों और आम लोगों को डराने और उनसे पैसे वसूलने के लिए पीएलएफआई टीम के सदस्यों से हमले कराता था।

इसके बाद अवैध धन को आरोपियों के करीबी सहयोगियों और परिवार के सदस्यों के नाम पर बैंकों और संदिग्ध फर्जी कंपनियों के जरिए निवेश किया गया।

यह संगठन बेरोजगार युवकों को मोटरसाइकिल, मोबाइल फोन और पैसे देकर अपनी ओर आकर्षित करता था।

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