देश की खबरें | देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की एसआईटी जांच संबंधी याचिका शीर्ष अदालत में खारिज

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने संबंधी राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी।

नयी दिल्ली, एक अप्रैल उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने संबंधी राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी।

इससे पहले बंबई उच्च न्यायालय भी एसआईटी जांच से संबंधित प्रदेश सरकार की याचिका को खारिज कर चुका है।

न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश की पीठ ने उच्च न्यायालय के 15 दिसंबर, 2021 के आदेश के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी।

पीठ ने कहा, “यह पूरी तरह से गुमराह करने वाली है... मैंने सोचा कि राज्य कुछ समझ दिखाएगा। लेकिन, ये अलग तरह की लड़ाई है। क्षमा करें, याचिका खारिज।”

सुनवाई की शुरुआत में महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सीए सुंदरम ने कहा कि सीबीआई के वर्तमान निदेशक महाराष्ट्र के पूर्व डीजीपी और पुलिस स्थापना बोर्ड का हिस्सा थे, जो स्थानांतरण और तैनाती के मामलों को देखता था। उन्होंने कहा कि सीबीआई अपने ही आचरण की जांच कैसे कर सकती है।

उन्होंने कहा, “सीबीआई के वर्तमान निदेशक उस वक्त स्थापना बोर्ड के अध्यक्ष थे, जो स्थानांतरण के लिए जिम्मेदार थे। वह संभवतः एक आरोपी हो सकते हैं या निश्चित रूप से एक गवाह। मैं पक्षपात की आशंका में नहीं जा रहा हूं, एक व्यक्ति जो गवाह या एक आरोपी के तौर पर प्रासंगिक है, वह सीधे तौर पर शामिल था।”

सुंदरम ने कहा, “मेरा एकमात्र निवेदन यह है कि यदि ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है तो आप एक एसआईटी बना सकते हैं या किसी और को मामले की जांच के लिए नियुक्त कर सकते हैं। यह निश्चित रूप से नहीं हो सकता है कि एक व्यक्ति जिसके खिलाफ एफआईआर में कार्रवाई के बारे में शिकायत की गई है, वही व्यक्ति उसकी जांच करे।”

उच्चतम न्यायालय ने 24 मार्च को पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह के खिलाफ कदाचार और भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी थी और कहा था कि इस मामले की जांच किसे करनी चाहिए, इस पर सत्ता के शीर्ष स्तर के बीच एक बहुत ही अस्पष्ट स्थिति जारी है।

शीर्ष अदालत ने कहा था कि राज्य पुलिस में लोगों का विश्वास फिर से बहाल करने के लिए गहन जांच की जरूरत है।

न्यायालय ने कहा था, “न्याय के सिद्धांत को आगे बढ़ाने के मद्देनजर जांच सीबीआई को स्थानांतरित करने की आवश्यकता है। हम यह नहीं कह रहे हैं कि अपीलकर्ता (सिंह) व्हिसल-ब्लोअर हैं या इस मामले में शामिल कोई भी व्यक्ति दूध से धुला है।”

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