जरुरी जानकारी | ग्रेट निकोबार द्वीप में 10,000 करोड़ रुपये के ट्रांस शिपमेंट बंदरगाह के निर्माण की योजना: मोदी

नयी दिल्ली, 10 अगस्त प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि बंगाल की खाड़ी में पोत परिवहन को नया आयाम देते हुये ग्रेट निकोबार द्वीप में 10,000 करोड़ रुपये की लागत से एक पोतांतरण बंदरगाह (ट्रांसशिपमेंट पोर्ट) का निर्माण करने की योजना है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में अंडमान निकोबार, बंदरगाह विकास से जुड़ी गतिविधियों के बड़े केन्द्र के रूप में विकसित होने वाला है।

मोदी ने चेन्नई से अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह को तेज इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराने वाली पहली समुद्री आप्टिकल फाइबर परियोजना का वीडियो कांफ्रेंस के जरिए उद्घाटन करते हुए अपने संबोधन में यह जानकारी दी। भारत की मुख्य भूमि से 2,312 किलोमीटर दूर तक इस केबल को समुद्र के अंदर बिछाया गया है जिस पर 1,224 करोड़ रुपये की लागत आई है। इससे इस द्वीप समूह को ‘‘बेहतर और सस्ती ब्रॉडबैंड’’ संपर्क सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

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प्रधानमंत्री ने इस मौके पर कहा कि अंडमान निकोबार को बंदरगाह से जुड़ी तमाम विकास गतिविधियों के प्रमुख केन्द्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह क्षेत्र दुनिया के कई ट्रांसशिपमेंट बंदरगाहों के मुकाबले काफी प्रतिस्पर्धी दूरी पर स्थित है।

मोदी ने कहा , ‘‘आज पूरी दुनिया यह मान रही है कि जिस देश में बंदरगाह का नेटवर्क और कनेक्टिविटी बेहतर होगी, वही 21वीं सदी के व्यापार को गति देगा। ऐसे में अंडमान-निकोबार में हो रहे ढांचागत सुविधाओं से जुड़े कार्य, उसे विकास की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाएंगे।’’

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प्रधानमंत्री ने कहा, अब ग्रेट निकोबार में करीब 10 हज़ार करोड़ रुपए की संभावित लागत से पोतांतरण बंदरगाह (ट्रांस शिपमेंट पोर्ट) के निर्माण की योजना है। कोशिश ये है कि आने वाले 4-5 साल में इसके पहले चरण को पूरा कर लिया जाए। एक बार जब ये बंदरगाह बनकर तैयार हो जाएगा तो यहां बड़े-बड़े जहाज़ भी रुक पाएंगे। इससे समुद्री व्यापार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ेगी और युवाओं को रोजगार के नए मौके मिलेंगे।

उन्होंने कहा कि अंडमान निकोबार द्वीप पर विकसित हाने वाले माल परिवहन के लिये समर्पित रणनीतिक कंटेनर पोतांतरण टर्मिनल के दो भौगोलिक फायदे होंगे। पहला यह व्यस्त पूर्वी- पश्चिमी अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी मार्ग के नजदीक है। यह पोतांतरण की बेहतर सुविधा देगा और कारोबारी गतिविधियां बढ़ेगी। दूसरा इस क्षेत्र में आधुनिक पीढ़ी वाले बड़े जहाजों की आवाजाही भी हो सकेगी।

पोतांतरण बंदरगाह पर माल को बड़े जलपोतों से उतार कर उसके गंतव्य तक पहुंचाने वाले दूसरे छोटे जहाजों पर लादा जाता है। गहरे समुद्र में चलने वाले बड़े जलपोत कम गहराई वाले बंदरगाहों तक नहीं पहुच पाते हैं।

अंडमान और निकोबार द्वीप प्रशासन ने पिछले साल ही ग्रेट निकोबार द्वीप में दक्षिणी खाड़ी में मुक्त व्यापार वेयरहाउसिंग जोन के साथ कंटेनर पोतांतरण टर्मिनल के लिये रुचि पत्र आमंत्रित किये हैं। इससे भारतीय पोत परिवहन को कोलंबो, सिंगापुर और पोर्ट क्लांग (मलेशिया) के पोतांतरण बंदरगाहों के समक्ष एक नया विकल्प उपलब होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज जब भारत आत्मनिर्भरता के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है, वैश्विक विनिर्माण केन्द्र के रूप में, वैश्विक आपूर्ति और मूल्य श्रृंखला के एक अहम भागीदार के रूप में खुद को स्थापित करने में जुटा है, तब हमारे जलमार्गो और बंदरगाहों के नेटवर्क को सशक्त बनाना बहुत ज़रूरी है। बीते 6-7 सालों से बंदरगाह विकास और बंदरगाह से जुड़ी गतिविधियों को लेकर जो काम हो रहा है, उससे देश को नई ताकत मिलेगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अंडमान निकोबार में तमाम आधुनिक ढांचा तैयार हो रहा है। इससे समुद्री आर्थिकी को बढ़ावा मिलेगा। मछलीपालन, एक्वाकल्चर, सीवीड फार्मिग जैसे कई लाभों की दुनिया में चर्चा हो रही है। कई देश इनकी संभावनाओं को देख रहे हैं। ‘‘मुझे खुशी है कि, अंडमान निकोबार में इसकी संभावनाओं को तलाशने के लिए पोर्ट ब्लेयर में जो पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया था, उसके नतीजे उत्साहित करने वाले हैं। इससे विशेषतौर पर हमारे मछुआरे साथियों को बहुत बड़ा लाभ होगा।’’

मोदी ने नेता जी सुभाषचंद्र बोस को नमन करते हुए कहा कि करीब डेढ़ वर्ष पहले उन्हें समुद्री आप्टिकल फाइबर केबल संपर्क परियोजना के शुभारंभ का अवसर मिला था। ‘‘अब इसका काम पूरा हुआ है और आज इसके लोकार्पण का भी सौभाग्य मुझे मिला है। चेन्नई से पोर्टब्लेयर, पोर्टब्लेयर से लिटिल अंडमान और पोर्टब्लेयर से स्वराज द्वीप तक, अंडमान निकोबार के एक बड़े हिस्से में ये सेवा आज से शुरु हो चुकी है।’’

उन्होंने कहा कि अंडमान-निकोबार के लोगों को इस सुविधा के लिए, अनंत अवसरों से भरी इस कनेक्टिविटी के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं, शुभकामनाएं देता हूं। ‘‘स्वतंत्रता दिवस से पहले ये अंडमान के लोगों के लिए एक प्रकार से 15 अगस्‍त के पूर्व इसी सप्‍ताह एक स्नेह भरे उपहार की तरह यह अवसर मैं देखता हूं।’’

भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) ने समुद्र के अंदर केबल बिछाने का यह चुनौतीपूर्ण कार्य 24 माह से भी कम समय में पूरा किया।

उन्होंने कहा कि मोबाइल और इंटरनेट कनेक्टिविटी के अलावा अंडमान और निकोबार में सड़क, हवाई और जलमार्ग के क्षेत्र में भी संपर्क एवं पहुंच मार्गों को मजबूत किया जा रहा है। उत्तरी और मध्य अंडामन के बीच सड़क संपर्क को बेहतर बनाने के लिये दो बड़े पुल बनाये जा रहे हैं और राषट्रीय राजमार्ग नंबर चार को चौड़ा किया जा रहा है।

पोर्ट ब्लेयर हवाईअड्डे की क्षमता बढ़ाई जा रही है और इसे एक समय में 1,200 यात्रियों के आवागमन की सुविधा देने लायक बनाया जा रहा है। इसके अलावा डिगलीपुर, कार निकोबार और केम्पबेल-बे में भी हवाईअड्डे परिचालन के लिये तैयार हैं।

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