देश की खबरें | निजी कंपनी में आईसीसी सदस्यों की सुरक्षा के लिए अदालत में जनहित याचिका दायर

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एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

मुंबई, चार जनवरी बंबई उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर कर अनुरोध किया गया है कि निजी कंपनियों में कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम के लिए गठित आंतरिक शिकायत समितियों (आईसीसी) के सदस्यों को लोक सेवक माना जाए और उनके लिए कुछ सुरक्षा उपाय किए जाएं।

यह याचिका नगर निवासी जानकी चौधरी द्वारा दायर की गयी है जो एक निजी कंपनी में काम कर रही थीं और वहां गठित आईसीसी की प्रमुख थीं। अधिवक्ता आभा सिंह ने कहा कि निजी कंपनियों की ऐसी समितियों के सदस्यों को कोई सुरक्षा नहीं दी जाती ताकि वे बिना किसी डर और पक्षपात के काम कर सकें।

याचिका में कहा गया है कि इस तरह की समिति के सदस्यों को कंपनी में कर्मचारी होने के दौरान ही यौन उत्पीड़न की शिकायतों पर फैसला करने का सांविधिक कर्तव्य सौंपा जाता है तथा उन्हें कंपनी से हटाया जा सकता है।

याचिका में कहा गया है, "इससे हितों का गंभीर टकराव पैदा होता है और सदस्य को स्वतंत्र व निष्पक्ष फैसला करने से रोकता है। यदि सदस्य द्वारा ऐसा निर्णय लिया जाता है जो वरिष्ठ प्रबंधन की इच्छा के विरुद्ध है, तो उन्हें निशाना बनाया जा सकता है।’’

इसमें कहा गया है कि चौधरी ने खुद ही आंतरिक शिकायत समिति की प्रमुख के रूप में अपने कार्यस्थल पर ऐसी चुनौतियों का सामना किया।

याचिका में अनुरोध किया गया है कि कानून की कमियों की समीक्षा और निजी क्षेत्र में आईसीसी सदस्यों की सुरक्षा संबंधी सिफारिशें करने के लिए एक आयोग गठित किया जाए।

मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जी एस कुलकर्णी की खंडपीठ इसी हफ्ते जनहित याचिका पर सुनवाई करेगी।

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