देश की खबरें | पीएफआई ने केंद्र का प्रतिबंध बरकरार रखने के अधिकरण के फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया
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नयी दिल्ली, आठ दिसंबर पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) ने केंद्र द्वारा उस पर लगाए गए पांच साल के प्रतिबंध को बरकरार रखने वाले गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) न्यायाधिकरण के आदेश को चुनौती देते हुए शुक्रवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की पीठ ने संगठन के अधिवक्ता से याचिका के कानूनी दायरे की जांच करने को कहा। पीठ ने कहा कि वह इस मामले में अपीलीय अदालत के रूप में कार्य नहीं कर सकती।
पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 और 227 के तहत उसका अधिकार क्षेत्र सीमित है क्योंकि यह उसे केवल प्राकृतिक न्याय और निर्णय लेने जैसे पहलुओं की समीक्षा करने का अधिकार देता है।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने याचिका में उठाए गए कुछ आधारों के खिलाफ अपनी आपत्ति जताई और कहा कि दलीलों को ‘‘सुधारा’’ जाना चाहिए।
उन्होंने याचिका में ‘‘प्रक्रिया का दुरुपयोग’’, ‘‘अपमानजनक’’ और ‘‘अत्याचारी’’ होने जैसे शब्दों के उपयोग पर आपत्ति जताते हुए कहा, ‘‘याचिका उचित प्रारूप में होनी चाहिए। यह अफवाह फैलाने वाला मंच नहीं हो सकता।’’
अदालत ने विधि अधिकारी से दलीलों में कथित आपत्तिजनक बयानों को हटाने के लिए एक आवेदन दायर करने को कहा।
शर्मा ने कहा कि याचिका में यह नहीं बताया गया है कि वह इस मामले में निर्णय लेने की प्रक्रिया को कैसे चुनौती दे रही है।
याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि प्रतिबंध के खिलाफ एक याचिका पहले उच्चतम न्यायालय में दायर की गई थी, जिसने उसे इसके बजाय उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता दी थी।
पीएफआई ने अपनी याचिका में यूएपीए अधिकरण के 21 मार्च के आदेश को चुनौती दी है जिसके द्वारा उसने केंद्र के 27 सितंबर, 2022 के फैसले को बरकरार रखा था।
केंद्र ने आईएसआईएस जैसे वैश्विक आतंकवादी संगठनों के साथ कथित संबंधों और देश में सांप्रदायिक नफरत फैलाने की कोशिश के लिए पीएफआई पर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया था।
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