देश की खबरें | बिहार में कोविड-19 महामारी से निबटने के लिये केन्द्र की फौरी मदद हेतु न्यायालय में याचिका
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नयी दिल्ली, 30 जुलाई उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर कर गुहार लगायी गयी है कि बिहार में कोविड-19 महामारी से निबटने के लिये केन्द्र को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया जाये क्योंकि राज्य में स्वास्थ्य सेवायें कथित रूप से चरमरा गयी हैं।
यह जनहित याचिका पटना निवासी कारोबारी आदित्य जालान ने दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की अवधि का इस्तेमाल करके कोविड-19 संक्रमण के मामले बढ़ने की स्थिति से निबटने के लिये स्वास्थ्य अवसंरचनाएं तैयार करने में बिहार सरकार विफल रही है।
अधिवक्ता रोशन संथालिया के माध्यम से दायर इस याचिका में कहा गया है, ‘‘पहले से ही बदहाल व्यवस्था पर कोविड-19 महामारी संकट ने असहनीय दबाव डाल दिया और इसका नतीजा यह हुआ कि बिहार की स्वास्थ सुविधायें पूरी तरह से चरमरा गयीं।’’
याचिका में अनुरोध किया गया है कि बिहार सरकार को सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के पूरी तरह विफल हो जाने के कारणों के बारे में स्पष्टीकरण देने और अब इस स्थिति से निबटने के लिये जरूरी कदमों की रूपरेखा बताने का निर्देश दिया जाये।
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याचिका में दावा किया गया है कि राज्य में कोविड-19 अस्पतालों तथा अस्पताल में बिस्तरों की कमी है। मेडिकल कर्मचारियों तथा जांच कर्मियों की कमी है। पृथकवास केन्द्रों में गंदगी है।
याचिका के अनुसार राज्य सरकार सामाजिक दूरी के नियमों को लागू कराने और अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों को पीपीई उपकरण उपलब्ध कराने में विफल हो गयी है।
याचिका में कहा गया है कि बिहार में हमेशा ही स्वास्थ्य सुविधायें अपर्याप्त रही हैं और कोविड-19 ने स्थिति को एकदम बेकाबू कर दिया है। याचिका में कहा गया है कि मार्च 2020 में लॉकडाउन लागू होने के बाद राज्य में लाखों प्रवासी कामगारों के लौटने से स्थिति ज्यादा खराब हो गयी। यही नहीं, रही सही कसर बिहार में हर साल आने वाली बाढ़ ने पूरी कर दी है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि बिहार में कोविड-19 से संक्रमित लोगों की संख्या में लगातार वृद्ध हो रही है और यहां पर सबसे कम जांच हो रही है।
अनूप
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