देश की खबरें | विशेष विवाह कानून के तहत 30 दिन की नोटिस अवधि को खत्म कराने के लिए याचिका दायर
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नयी दिल्ली, 24 सितंबर विशेष विवाह कानून (एसएमए) के तहत होने वाली शादियों के लिए आपत्ति मंगाने को लेकर जारी किए जाने वाले सार्वजनिक नोटिस के प्रावधानों को चुनौती देते हुए एक अंतरजातीय जोड़े ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है।
मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ के समक्ष बृहस्पतिवार को सुनवाई के लिए यह याचिका सूचीबद्ध थी लेकिन इस पर सुनवाई नहीं हो पायी क्योंकि याचिकाकर्ता की ओर से पेश होने वाले मुख्य वकील किसी दूसरे मामले में उच्चतम न्यायालय में जिरह कर रहे थे ।
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उच्च न्यायालय ने मामले को एक अक्टूबर के लिए सूचीबद्ध किया है ।
याचिका में कुछ आपत्तियों को चुनौती दी गयी है जैसे कि दोनों पक्षों में कोई मानसिक विकार से पीड़ित नहीं रहा हो या शादी की उम्र नहीं हुई हो। वकील उत्कर्ष सिंह के जरिए दाखिल याचिका में कहा गया है कि शादी पर आपत्ति के लिए 30 दिन की नोटिस अवधि याचिकाकर्ताओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है ।
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याचिका में आपत्ति दर्ज कराने के लिए 30 दिनों की नोटिस अवधि के कानून के प्रावधान को अमान्य करार देने का अनुरोध किया गया है ।
याचिका में केंद्र और दिल्ली सरकार से कानून के तहत आपत्तियों पर फैसला करने का भी अनुरोध किया गया है । याचिका में 30 दिनों की नोटिस अवधि को खत्म करने और याचिकाकर्ताओं की शादी के पंजीकरण के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया गया है ।
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