देश की खबरें | अनुग्रह-राशि के लिए श्रमिकों के आवेदनों का लंबित रहना गंभीर पहलू का परिचायक : उच्च न्यायालय

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण (बीओसीडब्ल्यूडब्ल्यू) बोर्ड के समक्ष भारी संख्या में पंजीकरण और नवीनीकरण के आवेदनों का लंबित रहना एक ''गंभीर तस्वीर उकेरता'' है क्योंकि वे सभी श्रमिक इस ''कठिन समय'' में उस अनुग्रह-राशि को प्राप्त नहीं कर पाएंगे, जिसके वह पात्र हैं।

नयी दिल्ली, 15 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण (बीओसीडब्ल्यूडब्ल्यू) बोर्ड के समक्ष भारी संख्या में पंजीकरण और नवीनीकरण के आवेदनों का लंबित रहना एक ''गंभीर तस्वीर उकेरता'' है क्योंकि वे सभी श्रमिक इस ''कठिन समय'' में उस अनुग्रह-राशि को प्राप्त नहीं कर पाएंगे, जिसके वह पात्र हैं।

उच्च न्यायालय ने कहा, '' सामने आए आंकड़े एक गंभीर तस्वीर उकेरते हैं क्योंकि बहुत बड़ी संख्या में नए पंजीकरण के साथ ही, नवीनीकरण के आवेदन अब तक लंबित हैं। आवेदनों के लंबित रहने का यह मतलब है कि बड़ी संख्या में भवन निर्माण में लगे श्रमिकों को इस कठिन समय में उक्त रकम देने से इंकार किया जा रहा है जो कि बोर्ड द्वारा वितरित की जाने वाली अनुग्रह राशि को पाने के पात्र हो सकते हैं।''

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न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की पीठ ने कहा कि आवेदनों के सत्यापन के लिए दिल्ली राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण (डीएसएलएसए) की ओर से प्रस्तावित करीब 100 विधि सहायक वकीलों की सहायता से लंबित आवेदनों को दो सप्ताह के भीतर निपटाया जा सकता है।

हालांकि, वकीलों की सहायता लिए जाने के उच्च न्यायालय के सुझाव को लेकर बोर्ड ने अपनी परेशानी जाहिर की और कहा कि डीएसएलएसए की ओर से प्रति वकील 1,800 रुपये दैनिक मानदेय तय किया गया है जिसका भुगतान करना उसके लिए मुश्किल होगा।

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बोर्ड की ओर से पेश दिल्ली सरकार के स्थायी वकील संजय घोष ने कहा कि बीओसीडब्ल्यूडब्ल्यू के प्रावधानों के अंतर्गत वेतन भुगतान और अन्य प्रशासनिक खर्च चालू वित्त वर्ष के कुल खर्च के पांच फीसदी से अधिक नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि मानदेय का भुगतान करने की सूरत में यह पांच फीसदी की तय सीमा को पार कर जाएगा।

इस पर पीठ ने कहा कि कार्य को संभालने के लिए बोर्ड में सक्षम व्यक्तियों की कमी होने के कारण लंबित आवेदनों का ढेर लग गया इसलिए इसे कर्मचारियों की दुर्दशा को ध्यान में रखते हुए डीएसएलएसए का प्रस्ताव स्वीकार करना चाहिए।

अदालत ने मंगलवार को जारी अपने आदेश में यह भी कहा कि जितना बोर्ड अपने अधिकारियों को भुगतान करेगा, उसकी तुलना में 1,800 रुपये का मानदेय काफी कम है।

पीठ ने बोर्ड को इस तथ्य पर भी विचार करके 17 जुलाई को अगली सुनवाई के दौरान अदालत को सूचित करने को कहा।

यह निर्देश सामाजिक कार्यकर्ता सुनील कुमार अलेदिया की ओर से दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिए गए।

कुमार ने याचिका में निर्माण कार्य में लगे सभी श्रमिकों का बीओसीडब्ल्यूडब्ल्यू अधिनियम के तहत पंजीकरण करने का अनुरोध किया था ताकि वे, लॉकडाउन के दौरान प्रत्येक श्रमिक को दिए जाने वाले 5,000 रुपये प्रतिमाह के राहत पैकेज का लाभ प्राप्त कर सकें।

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