देश की खबरें | चिकित्सा के क्षेत्र में भारतीय समग्र दृष्टिकोण अपनाने से जुड़ी याचिका में पक्ष बनना चाहता है पतंजलि

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. बाबा रामदेव के पतंजलि अनुसंधान संस्थान ने बृहस्पतिवार को दिल्ली उच्च न्यायालय से अनुरोध किया कि एलोपैथी, आयुर्वेद, योग और होम्योपैथी को अलग-अलग क्षेत्रों में बांटने के ‘‘औपनिवेशिक बंटवारे के तरीके’ के स्थान पर चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में ‘भारतीय समग्र दृष्टिकोण’ अपनाने और उसे लागू करने का अनुरोध करने वाली याचिका में उसे भी पक्ष बनाया जाए।

नयी दिल्ली, आठ सितंबर बाबा रामदेव के पतंजलि अनुसंधान संस्थान ने बृहस्पतिवार को दिल्ली उच्च न्यायालय से अनुरोध किया कि एलोपैथी, आयुर्वेद, योग और होम्योपैथी को अलग-अलग क्षेत्रों में बांटने के ‘‘औपनिवेशिक बंटवारे के तरीके’ के स्थान पर चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में ‘भारतीय समग्र दृष्टिकोण’ अपनाने और उसे लागू करने का अनुरोध करने वाली याचिका में उसे भी पक्ष बनाया जाए।

मुख्य न्यायाधीश एस. सी. शर्मा और न्यायमूर्ति एस. प्रसाद की पीठ ने कहा कि उक्त याचिका में पक्ष बनाए जाने का अनुरोध करने वाली हस्तक्षेप याचिका अभी रिकॉर्ड पर नहीं है और आवेदक संस्थान को इसे रिकॉर्ड पर लाने के लिए एक सप्ताह का समय दिया।

पतंजलि ने कहा कि वह याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर मुख्य याचिका में किए गए अनुरोध का समर्थन करता है।

उच्च न्यायालय को यह भी बताया गया कि केन्द्र सरकार ने इस याचिका पर जवाबी हलफनामा भी दाखिल किया है।

लेकिन अदालत ने कहा कि हलफनामा अभी रिकॉर्ड पर नहीं है और केन्द्र के अधिवक्ता को इसे रिकॉर्ड पर लाने के लिए दो सप्ताह का समय दिया। केन्द्र के अधिवक्ता ने अदालत से कहा था कि जनहित याचिका विरोधाभासी नहीं है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 नवंबर की तारीख तय की है।

याचिका में दावा किया गया है कि चिकित्सा के क्षेत्र में समग्र दृष्टिकोण, जिसमें आधुनिक और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को शिक्षा, प्रशिक्षण और नीतियों तथा नियमों के स्तर पर एकीकृत किया जाएगा... संविधान के अनुच्छेद 21, 39(ई), 41, 43, 47, 48 (ए), 51(ए) में प्रदत स्वास्थ्य के अधिकार को सुनिश्चित करेगा और स्वास्थ्य/चिकित्सा के क्षेत्र में देश में मरीजों/डॉक्टरों के अनुपात में भी सुधार लाएगा।

केन्द्र ने अपने हलफनामे में कहा है कि किसी भी पेशे को अपनाने का अधिकार संविधान प्रदत मौलिक अधिकार है लेकिन वह किसी भी पेशे के लिए आवश्यक पेशेवर कौशल/पात्रता से जुड़े कानूनों के तहत उचित होना चाहिए।

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