देश की खबरें | भूस्खलन में परिवार के पांच सदस्यों को खोने वाले पारधी बोले : शवों को मलबे में ही रहने दें

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मुंबई, 25 जुलाई महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के इरशालवाड़ी में हुए भूस्खलन में अपने परिवार के पांच सदस्यों को खोने वाले कमलू पारधी इतने दुखी हैं कि उनके शवों को नहीं देखना चाहते।

पारधी (65) ने कहा कि क्षत-विक्षत शवों को बाहर निकालकर और दर्द देने से अच्छा है कि उन्हें मलबे में ही ‘रहने’ दें।

कमलू पारधी के परिवार के नौ सदस्य 19 जुलाई को हुए भूस्खलन में दब गए थे। स्थानीय लोग और बचाव दल परिवार के चार सदस्यों को ही सुरक्षित निकाल पाए।

मुंबई से लगभग 80 किमी दूर तटीय जिले में एक पहाड़ी की ढलान पर स्थित आदिवासी गांव इरशालवाड़ी में 48 में से 17 घर पूरी तरह या आंशिक रूप से भूस्खलन के मलबे में दब गए थे।

‘‘ट्रैकिंग’’ के लिए लोकप्रिय इरशालगढ़ किले के पास बसे इस गांव में पक्की सड़क तक नहीं है, जिस वजह से मिट्टी खोदने वाली मशीनों को वहां ले जाना आसान नहीं था। ऐसे में श्रमिकों की मदद से खोज और बचाव अभियान चलाया गया, जो रविवार को बंद किया जा चुका है।

गांव में रहने वाले पारधी किसान हैं और वह ‘‘ट्रैकिंग’’ के लिए इरशालगढ़ आने वाले पर्यटकों को घर में रुकने की सुविधा प्रदान करते थे। उन्होंने इस भूस्खलन में अपनी पत्नी, छोटे बेटे काशीनाथ, बहू, 14 वर्षीय पोते और पांच वर्षीय पोती को खो दिया।

उन्होंने सोमवार को पीटीआई- से कहा, ‘‘मेरी पत्नी, बेटा, बहू और दो पोते-पोतियों वहीं दफन हो गए। उनके शव अब खराब हो गए होंगे और उनकी पहचान करना भी मुश्किल होगा। बेहतर होगा कि शवों को मलबे में ही छोड़ दिया जाए।’’

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