देश की खबरें | भारत में प्रतिकूल मौसम संबंधी घटनाओं के कारण 50 वर्षों में 1.3 लाख से अधिक लोगों की मौत : संरा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भारत में 1970 से लेकर 2021 के बीच बीते 50 वर्षों के दौरान प्रतिकूल मौसम संबंधी करीब 573 घटनाएं हुईं जिनमें 1,38,377 लोगों की मौत हुई। संयुक्त राष्ट्र की मौसम संबंधी एजेंसी विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने सोमवार को यह जानकारी दी।
नयी दिल्ली, 22 मई भारत में 1970 से लेकर 2021 के बीच बीते 50 वर्षों के दौरान प्रतिकूल मौसम संबंधी करीब 573 घटनाएं हुईं जिनमें 1,38,377 लोगों की मौत हुई। संयुक्त राष्ट्र की मौसम संबंधी एजेंसी विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने सोमवार को यह जानकारी दी।
वहीं, दुनिया भर में बीते 50 वर्षों के दौरान प्रतिकूल मौसम संबंधी 11,778 घटनाएं हुईं जिसके परिणामस्वरूप 20 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई और अर्थव्यवस्था को 4300 अरब डॉलर का नुकसान हुआ।
डब्ल्यूएमओ के मुताबिक प्रतिकूल मौसम संबंधी घटनाओं के कारण दुनिया भर में दर्ज किये गये मौत के मामलों में से 90 प्रतिशत से अधिक मौतें विकासशील देशों में हुई हैं।
डब्ल्यूएमओ ने सोमवार को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में शुरू हुई चतुष्कोणीय विश्व मौसम विज्ञान कांग्रेस के लिए नए निष्कर्ष जारी किए हैं। मौसम विज्ञान कांग्रेस की बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि 2027 के आखिर तक मौसम संबंधी प्रतिकूल घटनाओं के लिए चेतावनी प्रणाली में सुधार करने के लिए और अधिक प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।
डब्ल्यूएमओ के मुताबिक इसी अवधि के दौरान एशिया में ऐसी 3,612 घटनाएं हुईं, जिसके परिणामस्वरूप 9,84,263 लोगों की मौत हुई जबकि 1400 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ।
डब्ल्यूएमओ ने कहा, ‘‘ वर्ष 1970 और 2021 के बीच प्रतिकूल मौसम संबंधी घटनाओं के कारण दुनिया भर में दर्ज की गई मौतों में से 47 प्रतिशत मौतें एशिया में ही दर्ज की गयीं। वर्ष 2008 में उष्णकटिबंधीय चक्रवात नरगिस के कारण ही एशिया में 1,38,366 लोगों की मौत हुई थी। ’’
आंकड़ों के मुताबिक बांग्लादेश में ऐसी 281 घटनाएं हुईं जिसके कारण वहां एशिया में सबसे अधिक 5,20,758 लोगों की मौत हुई।
डब्ल्यूएमओ के मुताबिक इसी अवधि के दौरान अफ्रीका में ऐसी 1,839 घटनाएं हुईं, जिसके परिणामस्वरूप 7,33,585 लोगों की मौत हुई जबकि 43 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ। अफ्रीका में कुल जितने लोगों की मौत हुई उसमें से 95 प्रतिशत मौत सूखे के कारण हुईं।
डब्ल्यूएमओ के महासचिव पेटेरी तालास ने कहा, ‘‘सबसे कमजोर समुदाय दुर्भाग्य से मौसम, जलवायु और पानी से संबंधित सबसे अधिक खतरों का खामियाजा भुगतते हैं। ’’
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