देश की खबरें | मुंबई इमारत को अस्थायी रूप से कुर्क करने का आदेश क्रियान्वयन योग्य नहीं : एजेएल

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. नेशनल हेराल्ड अखबार की स्वामित्व वाली कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) ने बुधवार को दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा कि मुंबई स्थित उसकी नौ मंजिला इमारत को अस्थायी रूप से कुर्क करने का प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का मई 2020 का आदेश ‘‘क्रियान्वयन योग्य नहीं’’ है क्योंकि एजेंसी ने यह चिह्नित नहीं किया है कि इमारत का कौन सा हिस्सा कुर्क किया गया है।

नयी दिल्ली, 24 फरवरी नेशनल हेराल्ड अखबार की स्वामित्व वाली कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) ने बुधवार को दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा कि मुंबई स्थित उसकी नौ मंजिला इमारत को अस्थायी रूप से कुर्क करने का प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का मई 2020 का आदेश ‘‘क्रियान्वयन योग्य नहीं’’ है क्योंकि एजेंसी ने यह चिह्नित नहीं किया है कि इमारत का कौन सा हिस्सा कुर्क किया गया है।

ईडी ने पिछले साल एक बयान में कहा था कि मुंबई के बांद्रा स्थित इमारत का 16.38 करोड़ रुपये मूल्य का हिस्सा कुर्क किया गया है जो एजेएल के खिलाफ धनशोधन जांच के क्रम में आपराधिक तरीके से अर्जित पाया गया।

एजेएल ने उच्च न्यायालय में दलील दी कि पूरी इमारत को कुर्क किए जाने से इसके तीसरे तल से लेकर नौवें तल तक के लिए विभिन्न कंपनियों के साथ किए गए उसके पट्टा समझौते प्रभावित होंगे।

इसने अदालत से कहा कि वह भूतल से लेकर दूसरे तल और भूमिगत तल तक इसके अधिकारों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित किए बिना यथास्थिति बनाए रख सकती है क्योंकि इन हिस्सों का इस्तेमाल इसके खुद के उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने इसके बाद, ईडी के वकील से यह निर्देश लेने को कहा कि इमारत के 16.38 करोड़ रुपये मूल्य के किन हिस्सों पर वह यथास्थिति चाहता है।

उच्च न्यायालय ने ईडी से 12 मार्च तक सूचना देने को कहा और यह भी कहा कि तब तक भूतल से लेकर दूसरे तल तक यथास्थिति रखी जाए और इसमें कोई तीसरा पक्ष हित उत्पन्न न किया जाए।

उच्च न्यायालय पूर्व में भी ऐसे विभिन्न मामलों में यथास्थिति के आदेश दे चुका है जिनमें ईडी ने अस्थायी कुर्की का आदेश जारी किया था।

सुनवाई के दौरान एजेएल ने अदालत को बताया कि ईडी ने अंतिम कुर्की आदेश पारित किए जाने के संबंध में अपना फैसला सुरक्षित रखा है।

ईडी ने अदालत को बताया कि ऐसा ही एक अन्य मामला उच्च न्यायालय की खंडपीठ के समक्ष लंबित है जो चार मार्च को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।

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