देश की खबरें | न्यायालय से ईशा फाउंडेशन को राहत, योग व ध्यान केंद्र के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई न करने का आदेश
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नयी दिल्ली, 28 फरवरी ईशा फाउंडेशन को राहत देते हुए उच्चतम न्यायालय ने मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया जिसमें पर्यावरण मानदंडों के कथित उल्लंघन पर तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (टीएनपीसीबी) के नोटिस को रद्द कर दिया गया था। न्यायालय ने ईशा फाउंडेशन के योग एवं ध्यान केंद्र के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कोयंबटूर में वेल्लियांगिरी पर्वतीय क्षेत्र में बिना पूर्व पर्यावरणीय मंजूरी के निर्माण को लेकर जग्गी वासुदेव के ईशा फाउंडेशन के खिलाफ तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (टीएनपीसीबी) के नोटिस को रद्द करने के मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा।
न्यायालय ने योग और ध्यान केंद्र के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न करने का निर्देश दिया, लेकिन इसे टीएनपीसीबी के सभी पर्यावरणीय मानदंडों और निर्देशों का अनुपालन करने के लिए कहा।
हालांकि, शीर्ष अदालत ने कहा कि उसका आदेश अवैध निर्माण को नियमित करने के लिए एक मिसाल नहीं है क्योंकि उसने मामले के विशिष्ट तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर फैसला सुनाया।
तमिलनाडु के महाधिवक्ता पी एस रमन ने कहा कि सरकार केवल यह चाहती है कि आदेश को ‘स्थायी गेट पास’ के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए और इससे भविष्य में संपत्तियों के किसी भी निरीक्षण का कार्य बाधित नहीं होना चाहिए और केंद्र को पर्यावरणीय मानदंडों का पालन करना चाहिए।
न्यायालय की चिंता केवल ढांचे को ध्वस्त करने से संबंधित थी। ईशा फाउंडेशन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि राज्य के अधिकारियों को केंद्र का निरीक्षण करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि ऐसा होने पर फिर वही होगा।
रमन ने कहा कि नगर नियोजन प्राधिकरणों को निरीक्षण करने की अनुमति दी जानी चाहिए ताकि क्षेत्र में किसी अन्य इमारत के निर्माण को रोका जा सके, क्योंकि यह क्षेत्र संरक्षित वन के आसपास है।
पीठ ने कहा कि केंद्र के विस्तार के मामले में सक्षम प्राधिकारी की पूर्व मंजूरी आवश्यक होगी।
पीठ ने 14 फरवरी को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दो साल बाद उस आदेश के खिलाफ कदम उठाने के लिए फटकार लगाई, जिसमें ईशा फाउंडेशन के खिलाफ पर्यावरण मानदंडों का कथित रूप से उल्लंघन करने के लिए जारी किए गए कारण बताओ नोटिस को रद्द कर दिया गया था।
इसने टीएनपीसीबी द्वारा दायर याचिका को नौकरशाहों द्वारा खेला गया ‘दोस्ताना मैच’ करार दिया, जो याचिका को खारिज किये जाने पर सर्वोच्च न्यायालय की मुहर चाहते थे।
फाउंडेशन को 2006 से 2014 के बीच कथित तौर पर अनिवार्य पर्यावरणीय मंज़ूरी प्राप्त किए बिना इमारतों का निर्माण करने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, लेकिन मद्रास उच्च न्यायालय ने इसे रद्द कर दिया। यह मानते हुए कि कोयंबटूर में ईशा फाउंडेशन द्वारा स्थापित सुविधाएं शिक्षा श्रेणी में आएंगी, उच्च न्यायालय ने 14 दिसंबर, 2022 को टीएनपीसीबी के नोटिस को खारिज कर दिया।
उच्च न्यायालय ने 19 नवंबर, 2021 के नोटिस को रद्द कर दिया और जग्गी वासुदेव के ईशा फाउंडेशन की याचिका को स्वीकार कर लिया। यह कारण बताओ नोटिस पूर्व पर्यावरणीय मंजूरी के बिना वेल्लियांगिरी की तलहटी में इमारतों के निर्माण को लेकर था।
इस मामले के लंबित रहने के दौरान, केंद्र ने 19 मई, 2022 को एक ज्ञापन जारी कर शैक्षणिक संस्थानों को परिभाषित करते हुए उन संस्थानों को भी इसमें शामिल किया जो मानसिक, नैतिक और शारीरिक विकास के लिए आवश्यक चीजों पर प्रशिक्षण देते हैं।
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