ताजा खबरें | मणिपुर मुद्दे पर नहीं थमा विपक्ष का हंगामा, रास पूरे दिन के लिए स्थगित

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. मणिपुर के मुद्दे पर सदन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बयान और नियम 267 के तहत चर्चा कराए जाने की मांग पर अड़े विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण राज्यसभा की बैठक सोमवार को बार बार बाधित हुई और चार बार के स्थगन के बाद अपराह्न तीन बज कर 33 मिनट पर कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई।

नयी दिल्ली, 31 जुलाई मणिपुर के मुद्दे पर सदन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बयान और नियम 267 के तहत चर्चा कराए जाने की मांग पर अड़े विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण राज्यसभा की बैठक सोमवार को बार बार बाधित हुई और चार बार के स्थगन के बाद अपराह्न तीन बज कर 33 मिनट पर कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई।

बैठक चार बार स्थगित होने के बाद अपराह्न तीन बज कर 30 मिनट पर जब शुरू हुई तो सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि सरकार मणिपुर में हिंसा के मुद्दे पर अभी चर्चा करने के लिए तैयार है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के बयान और नियम 267 के तहत चर्चा कराए जाने की मांग को लेकर हंगामा और नारेबाजी कर रहे विपक्षी सदस्यों से कहा कि वे अपने स्थानों पर लौट जाएं ताकि चर्चा शुरू की जा सके।

विपक्षी सदस्य प्रधानमंत्री के बयान और नियम 267 के तहत चर्चा कराए जाने की मांग को लेकर नारेबाज करते रहे। तब सभापति ने कहा ‘‘हम देश के लिए अच्छा उदाहरण पेश नहीं कर रहे हैं। पूरा देश हमें देख रहा है। सरकार मणिपुर के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए तैयार है।’’

सदन में हो रहे हंगामे पर नाखुशी जताते हुए सभापति ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि 20 जुलाई से अब तक सदन के समय का कोई उपयोग नहीं किया गया।

संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ है और मणिपुर में हिंसा के मुद्दे पर दोनों सदनों की कार्यवाही बार बार बाधित हुई है।

सभापति ने कहा ‘‘हम अपना मजाक खुद उड़ा रहे हैं, दुनिया को हम बहुत खतरनाक संकेत दे रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि राज्यसभा उच्च सदन है और उसे जनहित की अपेक्षाओं के अनुरूप एक आदर्श उदाहरण पेश करना चाहिए।’’

हंगामा कर रहे सदस्यों से शांत रहने की अपील करते हुए सभापति ने कहा कि मणिपुर के मुद्दे पर चर्चा शुरू करनी चाहिए।

हंगामे के बीच ही संसदीय मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि अगर मणिपुर से संबंधित मुद्दों पर विपक्ष सचमुच गंभीर है और इस पर राजनीति नहीं करना चाहिए तो उन्हें चर्चा शुरू करने देना चाहिए।

उन्होंने कहा ‘‘हम अभी चर्चा के लिए तैयार हैं। हमारे गृह मंत्री वहां गए थे, हमारे गृह राज्य मंत्री 23 दिन तक वहां (मणिपुर) में थे। उनके (कांग्रेस नीत संप्रग सरकार के) कार्यकाल में ऐसा कभी नहीं हुआ।’’

जोशी ने कहा कि हंगामा करने के बजाय चर्चा करनी चाहिए।

सभापति ने सदस्यों से शांत रहने और चर्चा करने की अपील की लेकिन सदन में व्यवस्था बनते न देख उन्होंने अपराह्न तीन बज कर 33 मिनट पर बैठक पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी ।

इससे पहले सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही आरंभ होने पर सभापति धनखड़ ने बताया कि उन्हें नियम 267 के तहत 65 नोटिस मिले हैं। इसी बीच मणिपुर के मुद्दे पर चर्चा की मांग को लेकर विपक्षी सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया।

सदन के नेता पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार जब मणिपुर के मुद्दे पर चर्चा कराने के लिए तैयार है तो ऐसे में विपक्षी सदस्य सदन का महत्वपूर्ण समय बर्बाद कर रहे हैं। उन्होंने विपक्ष पर चर्चा से ‘‘भागने’’ का आरोप लगाया।

गोयल ने कहा, ‘‘हम आज ही इस मुद्दे पर चर्चा को तैयार हैं। आप दोपहर दो बजे चर्चा शुरु करें।’’

धनखड़ ने कहा कि वह 20 जुलाई को नियम 176 के तहत मिले नोटिस को स्वीकार कर चुके हैं और सरकार ने चर्चा की हामी भर दी है।

उन्होंने विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को अपनी बात रखने का मौका देते हुए पूछा कि क्या वह आज दो बजे चर्चा शुरु करने को तैयार हैं?

खरगे ने कहा, ‘‘हमने नियम 267 के तहत चर्चा के लिए नोटिस दिए हैं। हम इसी नियम के तहत चर्चा चाहते हैं।’’ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को सदन में आकर मणिपुर हिंसा पर बयान देना चाहिए।

इसी दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने हंगामा शुरु कर दिया जिसके चलते सभापति ने 11 बजकर 16 मिनट पर सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

एक बार के स्थगन के बाद दोपहर 12 बजे उच्च सदन की बैठक पुन: शुरू होने पर सभापति ने विशेष परिस्थिति का जिक्र करते हुए सदन में नेता प्रतिपक्ष खरगे को अपनी बात रखने के लिए कहा, लेकिन तब तक सत्ता पक्ष के सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया।

सदन में व्यवस्था नहीं बनते देख सभापति ने 12 बजकर 18 मिनट पर बैठक अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

दोपहर दो बजे सदन की बैठक फिर शुरू होने पर सभापति धनखड़ ने कहा कि अब सूचीबद्ध कामकाज के तहत सदन में मणिपुर में जातीय हिंसा के मुद्दे पर अल्पकालिक चर्चा करायी जानी है।

उन्होंने असम गण परिषद के वीरेंद्र प्रसाद वैश्य को अल्पकालिक चर्चा शुरू करने के लिए आमंत्रित किया। इसी बीच विपक्ष के सदस्य इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी के वक्तव्य की तथा सत्ता पक्ष के सदस्य मणिपुर मुद्दे पर चर्चा की मांग को लेकर हंगामा करने लगे।

सदन में व्यवस्था बनते न देख सभापति ने दो बजकर 11 मिनट पर बैठक की कार्यवाही दोपहर ढाई बजे तक स्थगित कर दी।

दोपहर ढाई बजे बैठक फिर शुरू होने पर सदन में वही नजारा देखने को मिला। विपक्ष के सदस्य प्रधानमंत्री से सदन में आने तथा मणिपुर के मुद्दे पर बयान देने की मांग करते हुए नारे लगा रहे थे।

सदन में हो रहे हंगामे और नारेबाजी को देखते हुए सभापति ने विभिन्न दलों के नेताओं को चर्चा के लिए बुलाया ताकि मौजूदा गतिरोध समाप्त हो सके।

धनखड़ ने कहा, ‘‘मेरा कार्यालय कुछ दलों के नेताओं को अपराह्न दो बजकर 45 मिनट पर बैठक करने के लिए नोटिस भेजेगा ताकि (गतिरोध को दूर करने के लिए) कोई रास्ता निकाला जा सके।’’

इसी के साथ उन्होंने बैठक शुरू होने के महज एक मिनट के भीतर अपराह्न साढ़े तीन बजे तक कार्यवाही स्थगित कर दी।

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