देश की खबरें | मसौदा देखकर यूसीसी पर अपनी सुविचारित राय रखेगा विपक्ष, चर्चा जारी है : राज्यसभा सदस्य मनोज झा

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नयी दिल्ली, 10 जुलाई राज्यसभा सदस्य मनोज झा ने सोमवार को कहा कि विपक्षी दल समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर अनौपचारिक चर्चा कर रहे हैं और मसौदा कानून आने के बाद इस पर “सुविचारित दृष्टिकोण” अपनाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बिहार “विपक्षी एकता की धुरी” होगा।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता ने यह भी कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विपक्ष की तरफ से प्रधानमंत्री पद के चेहरे की दौड़ में नहीं हैं और यह (महागठबंधन का) प्रयास भारतीय जनता पार्टी की राजनीति के खिलाफ एक “प्रगतिशील एजेंडा” प्रदान करने की दिशा में है, व्यक्तिगत संतुष्टि के बारे में नहीं।

अगले साल होने वाले आम चुनाव के लिए एक साझा एजेंडे पर चर्चा करने के लिहाज से विपक्षी दल 17 और 18 जुलाई को बेंगलुरु में बैठक की तैयारी कर रहे हैं और इस दौरान यूसीसी पर चर्चा की संभावना है। यूसीसी के एक मसौदे पर 23वां विधि आयोग काम कर रहा है।

समान नागरिक संहिता लाने की सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए झा ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 39 राज्यों को नागरिकों के आर्थिक कल्याण की रक्षा और बढ़ावा देने का निर्देश देता है, लेकिन मौजूदा सरकार का इस पर कभी ध्यान नहीं रहा, फिर भी यह अब अनुच्छेद 44 के तहत अनिवार्य यूसीसी लाने पर जोर दे रही है।

समान नागरिक संहिता के मुखर आलोचक रहे झा ने आरोप लगाया कि मौजूदा मसौदे के पीछे का विचार मतदाताओं का ध्रुवीकरण और विभाजन करना है।

राजद नेता ने कहा, “अनौपचारिक चर्चा चल रही है। मुझे हैरानी होती है कि जिन लोगों ने समान नागरिक संहिता के बारे में एक पैराग्राफ भी नहीं पढ़ा है, वे इसके बारे में बोल रहे हैं। वे नहीं जानते कि पिछले विधि आयोग ने क्या कहा था या 1948 की संविधान सभा में बी.आर. आंबेडकर की टिप्पणी क्या थी। इस सरकार में अज्ञानता वरदान है।”

उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश बलबीर सिंह की अध्यक्षता में 2015 और 2018 के बीच कार्यरत 21वें विधि आयोग ने कहा था कि यूसीसी न तो आवश्यक है और न ही वांछनीय है।

देश के पहले कानून मंत्री आंबेडकर ने 23 नवंबर 1948 को संविधान सभा में बोलते हुए सभी जगह यूसीसी लागू करने के प्रति आगाह किया था।

उन्होंने कहा था, “यह (अनुच्छेद 35) यह नहीं कहता है कि संहिता बनने के बाद राज्य इसे सभी नागरिकों पर केवल इसलिए लागू करेगा क्योंकि वे नागरिक हैं।”

वहीं, महाराष्ट्र में हालिया राजनीतिक घटनाक्रम से बिहार के सत्तारूढ़ गठबंधन में संभावित विभाजन की बढ़ी अटकलों के बीच झा ने कहा कि राज्य कभी “रिसॉर्ट राजनीति” के फेर में नहीं पड़ा है और यह “विपक्षी एकता का आधार” होगा।

झा ने कहा, “बिहार कभी भी रिसॉर्ट पॉलिटिक्स का शिकार नहीं हुआ है, अगर कोई बदलाव हुआ भी है तो वह बहुत सहजता से हुआ है। यह लोकतंत्र का चेहरा है। मैं उनसे कहना चाहता हूं...चिंता न करें, बिहार सुरक्षित है और विपक्षी एकता की धुरी बनेगा।”

शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) में हाल ही में हुए विभाजन में, अजित पवार सहित पार्टी के कई नेता महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना गठबंधन में शामिल हो गए। तब से, बिहार भाजपा के कई नेताओं ने सत्तारूढ़ जद-यू में विभाजन की भविष्यवाणी करते हुए बयान दिए हैं।

राज्यसभा सदस्य ने कहा, “मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूं कि बिहार बड़ी विपक्षी एकता और भाजपा के खिलाफ एक सकारात्मक एजेंडा स्थापित करने वाली घटनाओं में सबसे आगे रहेगा... मैं प्रधानमंत्री का चेहरा पढ़ सकता हूं, वह एक चिंतित व्यक्ति हैं। उनका चिंतित होना सही है, पहली बार उनके चारों ओर का प्रभामंडल हिल रहा है।”

नीतीश कुमार के विपक्ष का प्रधानमंत्री पद का चेहरा होने और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के बिहार का मुख्यमंत्री बनने की संभावनाओं के बारे में पूछे जाने पर झा ने कहा कि ये अटकलें हैं।

उन्होंने कहा, “1977 में कोई विपक्ष का चेहरा नहीं था, 2004 में कोई चेहरा नहीं था...भाजपा को देखिए, एक चेहरा सर्वोच्च है। कैबिनेट का कोई मतलब नहीं है। क्या हम उस तरह की स्थिति चाहते हैं? लड़ाई इन दो विकल्पों के बीच है, और नीतीश जी तथा तेजस्वी दोनों प्रमुख भूमिका निभाएंगे लेकिन विचार व्यक्तिगत संतुष्टि की ओर देखने का नहीं है।”

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