ताजा खबरें | रास में विपक्ष ने सरकार पर लगाया कामगारों के हितों की अनदेखी करने का आरोप

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नयी दिल्ली, 30 मार्च रोजगार सुरक्षा को वर्तमान में एक बड़ी चुनौती बताते हुए राज्यसभा में विपक्षी सदस्यों ने सरकार पर कामगारों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया वहीं सत्ता पक्ष ने दावा किया कि विकास के क्रम में हर क्षेत्र में रोजगार सृजित हुए हैं जिससे कामगारों को लाभ हुआ है।

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा की शुरुआत करते हुए द्रविड़ मुनेत्र कषगम के सदस्य एम षणमुगम ने कहा कि संविदा पर नियुक्ति के बाद कामगार का शोषण होता है और अपने रोजगार को खोने की आशंका के चलते इसे बर्दाश्त करना उसकी मजबूरी होती है। उन्होंने कहा कि आज यह चल रहा है। उन्होंने कहा कि कम वेतन, काम के अधिक घंटे, अन्य समस्याएं होने के बावजूद कामगारों के मन में रोजगार को लेकर असुरक्षा की भावना भरी होती है।

उन्होंने कहा कि आज दक्षता की बात की जाती है लेकिन कई कंपनियां ‘‘आउटसोर्स’’ करती हैं। इसके तहत बाहर से कर्मचारियों को ला कर काम सौंपा जाता है और पात्र तथा दक्ष कामगार मुंह ताकते रह जाते हैं।

षणमुगम ने कहा कि कई तरह से कर्मचारियों का शोषण होता है और इसके बावजूद उन्हें वह वेतन नहीं मिलता जिसके वे हकदार होते हैं। उन्होंने कहा कि न्यूनतम मजदूरी 72 रुपये प्रतिदिन तय की गई है और क्या आज यह कल्पना की जा सकती है कि इतनी मजदूरी में कोई कामगार काम कर पाएगा?

उन्होंने कहा कि कर्मचारी भविष्य निधि पर ब्याज दर घटाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यह राशि एक आम आदमी की जीवन भर की पूंजी होती है और ब्याज दर में कमी इस पर बड़ा आघात है।

उन्होंने कहा कि सरकार को कामगारों की पेंशन के लिए एक कोष गठित करना चाहिए जो उसने अब तक नहीं किया है।

षणमुगम ने कहा कि संगठित क्षेत्र हो या असंगठित क्षेत्र हो, कामगारों की समस्याएं हल होने के बजाय बढ़ी हैं और इसका परिणाम दो दिन चली हड़ताल के रूप में सामने आया है। उन्होंने संविदा पर काम करने वाले कर्मचारियों को नियमित करने समेत श्रम सुधारों और निजीकरण के प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की।

उन्होंने कहा कि ट्रेड यूनियनें अगर नहीं होंगी तो नियोक्ता-कामगारों के बीच संबंध कैसे बनेंगे? षणमुगम ने वर्ष 2015 के बाद भारतीय श्रम सम्मेलन का आयोजन ना किए जाने पर चिंता जताई और सरकार से आग्रह किया कि जल्द से जल्द इस सम्मेलन की बैठक की जाए और श्रमिकों से जुड़े मुद्दों तथा उनकी चिंताओं का निवारण किया जाए।

चर्चा को आगे बढ़ाते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि चार श्रम संहिता में अब समस्त कानून आ गए हैं। दो संहिताओं पर अभी विचार जारी है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने विभिन्न उपाय कर सभी लोगों को रोजगार प्रदान करने के प्रयास किए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने जो ई-श्रम पोर्टल बनाया है उसमें छह माह के अंदर ही 26 करोड़ लोगों ने अपने बारे में अपने कौशल के बारे में जानकारी देते हुए पंजीकरण कराया है। पहली बार रोजागर की वैज्ञानिक मैपिंग कर पोर्टल बनाया गया।

उन्होंने कहा ‘‘मेरे विचार से अभी काम 50 फीसदी ही हुआ है और आने वाले छह माह में 50 करोड़ लोग पंजीकृत हो सकते हैं जिसके बाद और रास्ते खुलने की उम्मीद है।’’

जावड़ेकर ने कहा कि कई तरह के काम ऐसे हैं जिनके लिए कामगार नहीं मिलते और कई पढ़े लिखे तथा कुशल लोगों को उनके अनुरूप काम नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि यह विसंगति हमारे देश में है। उन्होंने कहा ‘‘ शिक्षा एक बेहतरीन व्यक्ति को तैयार करती है लेकिन कौशल अलग बात होती है। इसके लिए कौशल विकास मंत्रालय बनाया गया और पिछले सात साल में पांच करोड़ युवाओं को तीन महीने , छह महीने से साल भर का कौशल प्रशिक्षण दिया गया है।’’

इससे पहले सदन में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सदस्य मल्लिकार्जुन खड़गे ने श्रम मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा के लिए तीन घंटे का समय तय किए जाने पर आपत्ति जताई और इसे बढ़ाने की मांग की। उपसभापति हरिवंश ने कहा कि समय कम होने की वजह से इस चर्चा के लिए तीन घंटे तय किए गए हैं।

जारी

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