देश की खबरें | अस्पताल में हमले में जान गंवाने वाली चिकित्सक के परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजे का अनुरोध
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केरल उच्च न्यायालय ने सोमवार को उस जनहित याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा, जिसमें इस माह के शुरू में एक मरीज के इलाज के दौरान उसी के द्वारा किए गए हमले में जान गंवाने वाली चिकित्सक के परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने का अनुरोध किया गया है।
कोच्चि, 22 मई केरल उच्च न्यायालय ने सोमवार को उस जनहित याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा, जिसमें इस माह के शुरू में एक मरीज के इलाज के दौरान उसी के द्वारा किए गए हमले में जान गंवाने वाली चिकित्सक के परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने का अनुरोध किया गया है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस वी भट्टी और न्यायमूर्ति बसंत बालाजी की पीठ ने राज्य सरकार से याचिका पर जवाब दायर करने के लिए कहा। साथ ही उन्होंने इस मामले को स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा के संबंध में अदालत के समक्ष लंबित इसी तरह की एक अन्य याचिका के साथ जोड़ दिया।
अधिवक्ता मनोज राजगोपाल की जनहित याचिका में यह दलील दी गई है कि सरकार ने हाल ही में मलप्पुरम में हुई नौका दुर्घटना और राज्य के कोझिकोड जिले में ट्रेन में आगजनी की घटना के पीड़ितों के परिवार को लाखों रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है। राजगोपाल की मां एक सेवानिवृत्त सिविल सर्जन ग्रेड-1 और सलाहकार सर्जन हैं।
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि हालांकि, निलंबित स्कूल शिक्षक जी संदीप द्वारा डॉ वंदना दास की नृशंस हत्या किए जाने के संबंध में ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है। संदीप को पैर में चोट के इलाज के लिए राज्य के कोल्लम जिले के तालुक अस्पताल ले जाया गया था।
पैर की ड्रेसिंग के दौरान ही संदीप ने डॉक्टर पर, सर्जरी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ब्लेड से कई बार वार किया जिससे उसकी मौत हो गई। उस दौरान उसे अस्पताल ले जाने वाले पुलिस अधिकारी भी मौजूद थे। इस पर उच्च न्यायालय ने टिप्पणी की कि उसकी मौत "व्यवस्थागत विफलता" का परिणाम है।
डॉ. दास के परिवार के लिए एक करोड़ रुपये के मुआवजे के अलावा, अधिवक्ता सी राजेंद्रन के माध्यम से दायर जनहित याचिका में उच्च न्यायालय द्वारा हत्या के मामले की जांच की निगरानी का भी अनुरोध किया गया है।
इसमें राज्य भर के अस्पतालों में डॉक्टर, नर्स और अन्य कर्मचारियों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए अदालत से दिशा-निर्देश दिए जाने का भी अनुरोध किया गया है।
राज्य में स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा के संबंध में, उच्च न्यायालय ने 11 मई को राज्य सरकार और पुलिस को युवा चिकित्सक की सुरक्षा में विफल रहने के लिए फटकार लगाई थी और कहा था कि इसे ‘‘एक अकेली घटना के रूप में खारिज नहीं किया जा सकता है।’’
इसने राज्य के पुलिस प्रमुख डीजीपी अनिल कांत को ‘‘यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि कानूनी रूप से संभव तरीके से सभी अस्पतालों को सुरक्षा प्रदान की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।’’
अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि आपराधिक न्याय प्रणाली के हिस्से के रूप में हिरासत में लिए गए व्यक्तियों - चाहे वे आरोपी हों या अन्य - को अस्पतालों में या डॉक्टर या स्वास्थ्य पेशेवरों के सामने पेश किये जाने के समय पर्याप्त प्रोटोकॉल अपनाया जाए।
इसके बाद, 17 मई को, केरल सरकार ने एक अध्यादेश को मंजूरी दी, जिसमें चिकित्सकों, मेडिकल छात्रों और राज्य में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में काम कर रहे अन्य लोगों को गंभीर शारीरिक नुकसान पहुंचाने के दोषी पाए जाने पर सात साल तक की कैद और अधिकतम 5 लाख रुपये के जुर्माने सहित कड़ी सजा का प्रावधान है।
डॉ. दास कोट्टायम जिले के कदुथुरुथी क्षेत्र की मूल निवासी और अपने माता-पिता की इकलौती संतान थी। वह अज़ीज़िया मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक हाउस सर्जन थी और अपने प्रशिक्षण के तहत कोल्लम जिले के कोट्टारक्कारा तालुक अस्पताल में काम कर रही थीं।
संदीप को 10 मई को तड़के पुलिस द्वारा इलाज के लिए वहां लाया गया था। उसने उस कमरे में रखे सर्जिकल ब्लेड से डॉक्टर पर अचानक हमला कर दिया, जहां उसके पैर की चोट की पट्टी की जा रही थी।
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