काठमांडू, सात जुलाई नेपाल के विपक्षी दलों ने मंगलवार को के पी ओली सरकार की “अपरिपक्व” विदेश नीति के लिए उसकी आलोचना करते हुए कहा कि यह पड़ोसियों के साथ देश के रिश्तों को बाधित कर रही है।
पिछले महीने रणनीतिक रूप से अहम तीन भारतीय क्षेत्रों- लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा- को देश के अद्यतन राजनीतिक मानचित्र में शामिल करने के उनकी सरकार के कदम के बाद से ही प्रधानमंत्री ओली कड़ी आलोचना का सामना कर रहे हैं।
यह भी पढ़े | चीन की बढ़ सकती है मुश्किलें, कोरोना महामारी के बाद ब्यूबोनिक प्लेग का संकट.
चीन की तरफ अपने झुकाव के लिये चर्चित ओली पर भारत विरोधी बयानों के लिये प्रधानमंत्री और पार्टी अध्यक्ष पद छोड़ने के लिये उनकी पार्टी के नेताओं की तरफ से भी दबाव है।
नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के कार्यकारी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ ने पिछले हफ्ते ओली के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा था कि उनका यह बयान कि भारत उन्हें हटाने की साजिश रच रहा है, “न तो राजनीतिक रूप से सही था न ही कूटनीतिक रूप से उचित।”
काठमांडू पोस्ट अखबार की खबर के मुताबिक विपक्षी दलों की मंगलवार को संपन्न हुई एक बैठक में कहा गया कि ओली सरकार ने बेहद असंतुलित और गैरजिम्मेदाराना विदेश नीति अपनाई है जो पड़ोसियों के साथ नेपाल के रिश्ते को बाधित कर रही है।
खबर के अनुसार, बैठक में कहा गया कि नेपाली कांग्रेस (एनसी) और जनता समाजबादी पार्टी (जेएसपी) के नेताओं के मुताबिक अपरिपक्व विदेश नीति आचरण के कारण पड़ोसियों से रिश्ते बिगड़े हैं और बेहद जटिल हो गए हैं।
एनसी के उपाध्यक्ष बिमलेंद्र निधी ने भारत का नाम लिये बगैर कहा, “बैठक में यह पाया गया कि सरकार की अपरिपक्व विदेश नीति की वजह से नेपाल को पड़ोसियों से अच्छे संबंध बरकरार रखने में मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है।”
रोचक बात यह है कि एनसी और जेएसपी ने पिछले महीने नेपाल के नए राजनीतिक मानचित्र को फिर से तैयार करने संबंधी ओली सरकार के संविधान संशोधन विधेयक का समर्थन किया था।
सरकार के इस कदम से भारत और नेपाल के बीच विवाद था और भारत ने स्पष्ट किया था कि काठमांडू द्वारा क्षेत्रीय दावों को बढ़ाचढ़ा कर पेश किया जाना यह स्वीकार्य नहीं है।
निधि ने कहा कि बैठक में मौजूदा राजनीतिक स्थिति, सरकार के सदन को स्थगित करने, विदेश नीति और कोरोना वायरस महामारी से खराब तरीके से निपटने समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई।
अपनी ही पार्टी के नेताओं द्वारा इस्तीफा देने के लिये बढ़ते दवाब के बीच ओली ने बीते बृहस्पतिवार को संसद के दोनों सदन की कार्यवाही का अवसान कर दिया था।
यह कदम वरिष्ठ नेताओं व पूर्व प्रधानमंत्री माधव नेपाल और झालानाथ खनल के समर्थन वाले पार्टी के प्रचंड धड़े को ओली के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने से रोकेगा।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY