देश की खबरें | राजस्थान में शाकाहारी डायनासोर के सबसे पुराने जीवाश्मों की खोज
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नयी दिल्ली, आठ अगस्त भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)-रुड़की और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) को जैसलमेर में लंबी गर्दन वाले शाकाहारी डायनासोर के सबसे पुराने जीवाश्म अवशेष मिले हैं, जिससे यह पता चलता है कि भारत डायनासोर के क्रमिक विकास का एक प्रमुख केंद्र था।
डायनासॉर की यह प्रजाति लगभग 16.7 करोड़ वर्ष पुरानी है, इसे थारोसॉरस इंडिकस नाम दिया गया है क्योंकि ये जीवाश्म पश्चिमी भारत के थार रेगिस्तान में पाए गए हैं।
‘साइंटिफिक रिपोर्ट्स’ नामक पत्रिका में इस डायनासोर का वर्णन किया गया है। इसकी पसलियों, गर्दन, धड़ और पूंछ व रीढ़ की हड्डी के हिस्सों को इसमें दर्शाया गया है।
थारोसॉरस की रीढ़ की हड्डी खास है, जिसके किनारों पर और सतह के नीचे गहरे, लंबे गड्ढे हैं, और रीढ़ की हड्डी के सबसे ऊपरी हिस्से कांटे (स्पाइक्स) दिखाई देते हैं।
शोधकर्ताओं ने कहा कि डायनासॉर की प्रजातियों में थारोसॉरस काफी प्राचीन है।
इससे पहले डायनासॉर पर हुए शोधों में सामने आया है कि सबसे पुराना डायनासोर चीन (लगभग 166-164 मिलियन वर्ष पुराना) का था और डायनासोर के पूर्वजों के एशिया और अमेरिका में मौजूद होने की उम्मीद है।
शोधकर्ताओं ने कहा कि डायनासोर के सबसे पुराने जीवाश्म अवशेष मिलने से यह पता चलता है कि भारत डायनासोर के क्रमिक विकास का एक प्रमुख केंद्र था।
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