देश की खबरें | पाठ्यपुस्तक में जायसी के संदर्भ पर आपत्ति जताई

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. राजस्थान के एक सांस्कृतिक संगठन ने स्कूली शिक्षा की एक किताब में अवधी के कवि मलिक मोहम्मद जायसी के नये जोड़े गए संदर्भ पर आपत्ति जताई है। चित्तौड़गढ़ के तत्कालीन शासक रावल रतन सिंह के इतिहास का वर्णन करते हुए जायसी का यह संदर्भ दसवीं कक्षा की सामान्य ज्ञान की पाठ्यपुस्तक में जोड़ा गया है।

जयपुर, एक जुलाई राजस्थान के एक सांस्कृतिक संगठन ने स्कूली शिक्षा की एक किताब में अवधी के कवि मलिक मोहम्मद जायसी के नये जोड़े गए संदर्भ पर आपत्ति जताई है। चित्तौड़गढ़ के तत्कालीन शासक रावल रतन सिंह के इतिहास का वर्णन करते हुए जायसी का यह संदर्भ दसवीं कक्षा की सामान्य ज्ञान की पाठ्यपुस्तक में जोड़ा गया है।

संगठन 'जौहर स्मृति संस्थान' को आपत्ति है कि अधिकारियों ने पाठ्यपुस्तक के पाठ 'राजस्थान का इतिहास और संस्कृति' में दो शताब्दियों और दो अलग-अलग क्षेत्रों में बंटे दो ऐतिहासिक घटनाक्रमों को सम्बद्ध करने का प्रयास किया है।

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संगठन के प्रमुख तख्त सिंह सोलंकी के अनुसार रावल रतन सिंह (1303) और मलिक मोहम्मद जायसी (1540) में 237 वर्ष का अंतर है। उस काल की इतिहास की किसी भी पुस्तक में यह नहीं कहा गया है कि अलाउद्दीन खिलजी ने रानी पद्मिनी के लिये चित्तौड़गढ पर आक्रमण किया था। यह ऐतिहासिक गलती है जिसे राजपूतों की भावनाओं से खेलने के लिये बार बार दोहराया जा रहा है।

यह संगठन खुद को सामाजिक और अनुसंधान केन्द्र के रूप में परिभाषित करता है। संगठन खिलजी द्वारा चित्तौड़ का गढ़ जीते जाने के बाद हुए जौहर की याद में हर साल 'जौहर मेला' आयोजित करता है।

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यह संगठन उस समय चर्चा में आया जब इसने फिल्म 'पद्मावत' के निर्देशक संजय लीला भंसाली, अभिनेता रणवीर सिंह और फिल्म को समर्थन देने वाले सलमान खान के पुतले जलाये।

संगठन को पाठ्यपुस्तक के जिस संदर्भ पर आपत्ति है उसके अनुसार मलिक मोहम्मद जायसी की कविता पद्मावत में बताया गया है कि अलाउद्दीन खिलजी ने रावल रतन सिंह पर उनकी पत्नि पद्मिनी के लिये आक्रमण किया था।

संगठन के कोषाध्यक्ष नरपत सिंह भाटी के अनुसार ऐसा प्रतीत होता है कि ‘‘वर्तमान सरकार ने अपने वोट बैंक को खुश करने के लिये यह किया है। लगातार सरकारों द्वारा हमारे राजाओं को धूमिल करने के श्रृंखलाबद्ध प्रयासों से राजपूत कभी भी परेशान नहीं हुए लेकिन हमारी सहनशीलता की एक सीमा है विशेषकर जबकि आधुनिक भारत को दिशा देने वाले बलिदानों की बात आती है जिनमें महाराणा प्रताप और महारानी पद्मिनी भी शामिल हैं।’’

उदयपुर के इतिहासकार चंद्र शेखर शर्मा ने बताया कि जियाउद्दीन बरनी ने अपनी पुस्तक 'तारिक—ए—फिरोज शाही' में लिखा है कि खिलजी ने गुजरात के वाघेला वंश के राजा कर्ण पर उनकी पत्नी को हथियाने के लिये आक्रमण किया था।

शर्मा ने बताया कि फारसी इतिहासकारों ने चित्तौड़गढ़ किले पर आक्रमण के पीछे पद्मिनी की भूमिका पर कुछ नहीं कहा यहाँ तक कि खिलजी के दरबारी इतिहासकार अमीर खुसरो ने अपने युद्ध संस्मरण खजाइन-उल-फुतूह ने चित्तौड़गढ़ पर हमले के बारे में उल्लेख किया है लेकिन पद्मिनी पर एक शब्द नहीं कहा है

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