जरुरी जानकारी | एनटीपीसी-सेल के संयुक्त उद्यम ने रख-रखाव का ठेका देने में किया सीवीसी दिशानिर्देशों का उल्लंघन: कैग

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने कहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एनटीपीसी और सेल के संयुक्त उद्यम एनटीपीसी सेल पावर कंपनी लि. (एनएसपीसी) ने 129.76 करोड़ रुपये के नियमित रखरखाव के काम का ठेका प्रतिस्पर्धी बोली के बिना सीधे देते हुए एक निजी इकाई को अनुचित लाभ पहुंचाया। कैग ने कहा है कि इस तरह ठेका देना केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के दिशानिर्देशों का उल्लंघन है।

नयी दिल्ली, नौ फरवरी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने कहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एनटीपीसी और सेल के संयुक्त उद्यम एनटीपीसी सेल पावर कंपनी लि. (एनएसपीसी) ने 129.76 करोड़ रुपये के नियमित रखरखाव के काम का ठेका प्रतिस्पर्धी बोली के बिना सीधे देते हुए एक निजी इकाई को अनुचित लाभ पहुंचाया। कैग ने कहा है कि इस तरह ठेका देना केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के दिशानिर्देशों का उल्लंघन है।

संसद में मंगवार को पेश कैग की 18वीं रिपोर्ट के अनुसार इस कार्य का आबंटन 2013-14 से 2018-19 के दौरान किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘एनटीपीसी सेल पावर कंपनी लि. ने 2013-14 से 2018-19 के दौरान एक निजी इकाई को 129.76 करोड़ रुपये मूल्य का नियमित रखरखाव का काम सौंपा। यह कार्य सीवीसी के दिशानिर्देशों/सार्वजनिक खरीद नियमन की अनदेखी कर अनुबंध मूल्य के 10 प्रतिशत लाभ के मार्जिन के आधार पर सीधे सौंपा।’’

एनटीपीसी और भारतीय इस्पात प्राधिकरण की संयुक्त उद्यम एनटीपीसी सेल पावर कंपनी लि. (एनएसपीसीएल) बिजली उत्पादक कंपनी है। कंपनी के बिजलीघर भिलाई,दुर्गापुर और राऊरकेला में हैं।

रिपोर्ट के अनुसार एनएसपीसीएल निदेशक मंडल ने अगस्त 2007 में यूटिलिटी पावरटेक लि. (यूपीएल) के साथ एनटीपीसी के समझौतों की तर्ज पर बिजलीघर रखरखाव समझौता किया।

यूपीएल के रखरखाव समझौते को जनवरी 2008 में 10 साल के लिये मंजूरी दी गयी। लेकिन दोनों पक्षों की आपसी सहमति से समझौता मई 2016 में समाप्त कर दिया गया।

उसके बाद कंपनी ने यूपीएल के साथ मई 2016 में पांच साल के लिये नया रखरखाव समझौता किया।

एनएसपीसीएल भिलाई, राऊरकेला और दुर्गापुर में यूपीएल ने 2013-19 के दौरान कुल 346 कार्य किये। इसमें उप-ठेके पर किये गये कार्य शामिल थे। इसके लिये कंपनी को 129.76 करोड़ रुपये के भुगतान किये गये। इसमें 11.53 करोड़ रुपये का लाभ मार्जिन शामिल था।

इनमें से 4.58 करोड़ रुपये के 75 कार्य यूपीएल ने स्वयं किये जबकि 125.18 करोड़ रुपये का 271 कार्य उप-ठके पर कराये गये।

सीवीसी के जुलाई 2007 के आदेश के तहत किसी भी सरकारी एजेंसी के लिये काम का ठेका देने के लिये निविदा प्रक्रिया या सार्वजनिक नीलामी जरूरी है। कोई भी दूसरा तरीका खासकर नामांकन आधार पर कार्य का ठेका देना संविधान के अनुच्छे 14 में प्रदत्त समानता के अधिकार , सार्वजनिक खरीद अधिनियम, सीवीसी दिशानिर्देश और उच्चतम न्यायालय के 2006 के आदेश का उल्लंघन है। साथ ही यह कंपनी के हित के भी खिलाफ है।

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