देश की खबरें | एनएसएस महासचिव नायर ने मंदिर में रीति-रिवाजों में बदलाव का समर्थन करने के लिए विजयन की आलोचना की

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कोट्टायम (केरल), दो जनवरी नायर सर्विस सोसाइटी (एनएसएस) के महासचिव जी सुकुमारन नायर ने मंदिर में रीति-रिवाजों में बदलाव का समर्थन करने के लिए केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की बृहस्पतिवार को आलोचना की।

विजयन ने एक मठ के प्रमुख स्वामी के उस आह्वान का समर्थन किया है, जिसमें राज्य के मंदिरों में प्रवेश करने से पहले पुरुष श्रद्धालुओं को कमर से ऊपर के वस्त्र उतारने की आवश्यकता संबंधी लंबे समय से जारी प्रथा को समाप्त करने की बात कही गई है।

नायर ने छह साल पहले सबरीमला भगवान अयप्पा मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व किया था। उन्होंने कहा कि मंदिर की परंपराओं में हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक मंदिर की अपनी परंपराएं होती हैं जिन्हें न तो सरकार और न ही कोई व्यक्ति बदल सकता है।

उन्होंने यह बयान चंगनास्सेरी में एनएसएस मुख्यालय में मन्नाथु पद्मनाभन जयंती समारोह के तहत आयोजित एक बैठक को संबोधित करते हुए दिया। बैठक का उद्घाटन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला ने किया।

नायर का यह बयान संत एवं समाज सुधारक श्री नारायण गुरु द्वारा स्थापित प्रसिद्ध शिवगिरि मठ के प्रमुख स्वामी सच्चिदानंद के बयान के बाद आया है।

स्वामी सच्चिदानंद ने मंगलवार को शिवगिरि तीर्थयात्रा सम्मेलन में अपने संबोधन के दौरान इस प्रथा को एक सामाजिक बुराई बताया था तथा इसके उन्मूलन का आह्वान किया था। मुख्यमंत्री ने स्वामी सच्चिदानंद के इस आह्वान का समर्थन किया था।

मुख्यमंत्री विजयन ने बुधवार को कहा था कि राज्य के मंदिरों में प्रवेश करने से पहले पुरुष श्रद्धालुओं को कमर से ऊपर के वस्त्र उतारने की आवश्यकता संबंधी मौजूदा प्रथा को देवस्वम बोर्ड समाप्त करने की योजना बना रहा है।

मुख्यमंत्री और शिवगिरि मठ के रुख की आलोचना करते हुए नायर ने कहा, ‘‘ईसाई और मुसलमानों के भी अपने रीति-रिवाज हैं। क्या मुख्यमंत्री या शिवगिरि मठ में उनकी आलोचना करने का साहस है? मुख्यमंत्री को इसका समर्थन नहीं करना चाहिए था। हर मंदिर की अपनी परंपराएं और रीति-रिवाज होते हैं, जिनका सम्मान किया जाना चाहिए और उसी के अनुसार उनका पालन किया जाना चाहिए।’’

स्वामी सच्चिदानंद के इस बयान पर कि श्री नारायण गुरु से जुड़े मंदिर इस प्रथा को समाप्त कर देंगे, नायर ने कहा कि यह धारणा अस्वीकार्य है कि हिंदुओं पर सब कुछ थोपा जा सकता है या उन्हें मजबूर किया जा सकता है।

स्वामी ने अपने भाषण में कहा था कि अतीत में कमर से ऊपर के कपड़े उतारने की प्रथा यह सुनिश्चित करने के लिए शुरू की गई थी कि पुरुषों ने "पूनूल" (ब्राह्मणों द्वारा पहने जाने वाला जनेऊ) पहना है, या नहीं।

उन्होंने यह भी कहा था कि यह प्रथा श्री नारायण गुरु के उपदेशों के विरुद्ध है और यह देखकर दुख होता है कि इस सुधारक संत से जुड़े कुछ मंदिर अब भी इसका पालन कर रहे हैं।

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