नयी दिल्ली, सात अक्टूबर निर्यातकों के शीर्ष संगठन फियो ने बुधवार को कहा कि निर्यात क्षेत्र में कंटनेर की उपलब्धता नहीं होना अब एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। कंटेनर नहीं मिलने से निर्यात दायित्वों को समय पर पूरा करना मुश्किल हो रहा है।
निर्यातकों के संगठन ‘फैडरेशन आफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गनाइजेशंस (फियो) के अध्यक्ष शरद कुमार सराफ ने कहा कि पिछले कुछ महीनों से तीन से चार सप्ताह पहले जगह देने की पेशकश करने के बाद जहाजरानी कंपनियां कंटेनर को यह कहते हुये अचानक बंद कर देती हैं कि जलयान में जगह नहीं बची है।
उन्होंने यह भी कहा कि जुलाई के बाद से समुद्री रास्ते से माल भेजने के भाड़े में वृद्धि होने लगी है। जहाजी कंपनियों ने भाड़े गंतव्य स्थल के हिसाब से 20 से लेकर 40 प्रतिशत तक बढ़ा दिए हैं।
सराफ ने कहा कि जहाजरानी क्षेत्र के लिये एक नियामकीय एजेंसी की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि प्रस्तावित राष्ट्रीय लाजिस्टिक्स उत्कर्ष पूर्वानुमेयता और सुरक्षा (एनएलईएपीएस) कानून को तैयार किया जायेगा और आयात- निर्यात क्षेत्र को इस तरह के अचानक होने वाले बदलावों से बचाने के लिये जल्द से जल्द लागू किया जायेगा।’’
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उन्होंने कहा कि निर्यात कारोबार में तेजी आने लगी है ऐसे में निर्यात कारोबार से जुड़ी तमाम साजोसामान की सुविधाओं की तरफ ध्यान दिये जाने की आवश्यकता है, अन्यथा हमारे निर्यातकों के समक्ष जो नये अवसर सामने आये हैं उनका लाभ वह नहीं उठा पायेंगे।
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