देश की खबरें | सराय काले खां में आईएसबीटी के पुनर्विकास के लिए भूमि आवंटन करने के वास्ते अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने सराय काले खां में दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआइबी) की 2.5 एकड़ भूमि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) को आवंटित करने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिया है, जिससे वहां अंतरराज्यीय बस अड्डा (आईएसबीटी) के पुनर्विकास का मार्ग प्रशस्त हो गया है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

नयी दिल्ली, 19 मई दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने सराय काले खां में दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआइबी) की 2.5 एकड़ भूमि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) को आवंटित करने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिया है, जिससे वहां अंतरराज्यीय बस अड्डा (आईएसबीटी) के पुनर्विकास का मार्ग प्रशस्त हो गया है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

सराय काले खां, दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर पर प्रमुख स्टेशनों में से एक है।

राजभवन के अधिकारियों का कहना है कि एक बार पुनर्विकसित और एकीकृत होने के बाद सराय काले खां दिल्ली के सबसे बड़े बहु परिवहन केंद्र के रूप में उभरेगा जिसके तहत एक ही जगह पर आईएसबीटी, दिल्ली मेट्रो, भारतीय रेल और रिजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) की सुविधा होगी।

एनसीआरटीसी को अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) परियोजना के लिए डीयूएसआईबी की 2.5 एकड़ भूमि को आवंटित करने के लिए जारी किया गया है, जिस पर आईएसबीटी के पुनर्विकास के अलावा यात्री अवसंरचना और सुविधाओं का निर्माण भी किया जाएगा।

इस भूमि के लिए अनुरोध पिछले साल दो फरवरी को दिल्ली परिवहन अवसंरचना विकास निगम (डीटीआईडीसी) द्वारा किया गया था। यह भूमि डीयूएसआईबी के पास है और अतिक्रमण से मुक्त होने की पुष्टि की गई है, जिससे यह अब आवंटन के लिए उपलब्ध है।

अधिकारियों ने बताया कि डीयूएसआईबी ने यह भी सत्यापित किया है कि इस भूमि से संबंधित कोई भी मामला न्यायालय में लंबित नहीं है।

इस भूखंड पर तीन रैन बसेरे मौजूद हैं। नौ मई 2023 के उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार, इन रैन बसेरों को अदालत की मंजूरी के बिना नहीं हटाया जा सकता है।

डीयूएसआईबी रैन बसेरों और उनमें रहने वालों को पास के स्थान पर स्थानांतरित करने की अनुमति मांगने के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख करेगा।

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