देश की खबरें | विज्ञापनों में त्वचा के रंग के कारण कोई भेदभाव नहीं प्रदर्शित करना चाहिये: अश्विनी चौबे
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नयी दिल्ली, 20 सितंबर केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने रविवार को कहा कि विज्ञापनों में त्वचा के रंग के परिणामस्वरूप किसी भी तरह के भेदभाव को नहीं प्रदर्शित करना चाहिये।
उन्होंने कहा कि ‘उत्पाद के इस्तेमाल से पहले के चित्रण’ में एक मॉडल की अभिव्यक्ति को नकारात्मक तरीके से नहीं दर्शाया जाये, जिसे आम तौर पर अनाकर्षक, हताश-परेशान या चिंतित माना जाता है।
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चौबे ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में यह कहा।
दरअसल, यह सवाल किया गया था कि क्या केंद्र त्वचा को गोरा बनाने वाले क्रीमों को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रही है।
इसके लिखित जवाब में स्वास्थ्य राज्यमंत्री ने कहा कि विज्ञापन उद्योग की स्व-नियामक संस्था भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (एएससीआई) ने स्व-नियामक निकाय उपभोक्ता शिकायत परिषद का गठन किया है। यह निकाय, विज्ञापनों की सामग्री, भ्रामक, झूठे और निराधार दावों वाले विज्ञापनों के खिलाफ शिकायतों पर निर्णय करेगी।
चौबे ने कहा कि एएससीआई स्व-नियामक दिशानिर्देशों का उपयोग कर रहा है, जिसके अनुसार विज्ञापन में त्वचा के रंग के परिणामस्वरूप किसी भी तरह के भेदभाव की भावना पैदा नहीं करनी चाहिए।
चौबे ने कहा कि इसके अलावा, स्वास्थ्य मंत्रालय ने दवा एवं चमत्कारी उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) (संशोधन) विधेयक पर अंशधारकों की टिप्पणियों को प्राप्त करने के लिए तीन फरवरी को एक नोटिस जारी किया गया है।
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