देश की खबरें | यूक्रेन मुद्दे पर सहमति नहीं : जी20 नेताओं के बयान के मसौदे पर रूसी दूत ने कहा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने शुक्रवार को कहा कि यूक्रेन युद्ध के अलावा सभी मुद्दों पर जी20 देशों के बीच आम सहमति है और इस विवादास्पद विषय को नेताओं के बयान के मसौदे से हटा दिया जाना चाहिए ताकि अगले सप्ताह समूह के शिखर सम्मेलन में इसके जारी होने का मार्ग प्रशस्त हो सके।
नयी दिल्ली, एक सितंबर रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने शुक्रवार को कहा कि यूक्रेन युद्ध के अलावा सभी मुद्दों पर जी20 देशों के बीच आम सहमति है और इस विवादास्पद विषय को नेताओं के बयान के मसौदे से हटा दिया जाना चाहिए ताकि अगले सप्ताह समूह के शिखर सम्मेलन में इसके जारी होने का मार्ग प्रशस्त हो सके।
अलीपोव ने कहा कि रूस जी20 की भारतीय अध्यक्षता के तहत उसकी प्राथमिकताओं का "खुले तौर पर" समर्थन कर रहा है। इसके साथ ही उम्मीद जताई कि शिखर सम्मेलन भारत और पूरे विश्व के लिए "बड़ी कामयाबी" होगी।
यूक्रेन संकट का वर्णन करने वाले पाठ को लेकर रूस-चीन गठबंधन तथा पश्चिमी देशों के बीच तीखा मतभेद है।
अलीपोव ने विदेशी संवाददाता क्लब में पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुए कहा, "स्पष्ट है, स्थिति जटिल है। यूक्रेन (मुद्दे) पर आम सहमति नहीं है।"
समूह के मौजूदा अध्यक्ष के तौर पर भारत 9 और 10 सितंबर को नयी दिल्ली में जी20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा।
मसौदा बयान के पाठ में, यूक्रेन संघर्ष के बारे में दो पैराग्राफ जी20 नेताओं की बाली घोषणा से लिए गए थे, जिसे पिछले साल नवंबर में जारी किया गया था।
बाली घोषणा में रूस और चीन दोनों यूक्रेन संघर्ष पर दो पैराग्राफ पर सहमत हो गए थे, लेकिन इस साल वे इससे पीछे हट गए, जिससे भारत के लिए इस जटिल मुद्दे पर आम सहमति बनाने में परेशानी हो रही है।
ऐसी आशंका है कि यूक्रेन संघर्ष के जिक्र के संबंध में आम सहमति नहीं बनती है तो नेताओं की घोषणा के बिना ही शिखर सम्मेलन समाप्त हो सकता है।
अलीपोव ने पूछा, "अगर सिर्फ एक विषय पर आम सहमति नहीं है और अन्य सभी मुद्दों पर आम सहमति है, तो ऐसी स्थिति में हम क्या करेंगे।"
उन्होंने कहा, "जलवायु परिवर्तन, सतत विकास, वित्तीय संकट, खाद्य संकट जैसे अत्यंत सामयिक मुद्दों पर सहमति के लिए हमें गैर-सहमति वाले मुद्दे को एजेंडे से हटा देना चाहिए।"
अलीपोव ने सुझाव दिया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद जैसे निकाय हैं जिन्हें यूक्रेन संघर्ष पर विचार-विमर्श करना चाहिए और रूस चर्चा के लिए तैयार है।
रूसी दूत ने कहा कि जी20 की स्थापना विश्व के सामने मौजूद वित्तीय और आर्थिक समस्याओं के हल के लिए की गई थी, न कि भू-राजनीतिक मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के लिए। उन्होंने कहा, "अगर आम सहमति नहीं है तो राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा नहीं की जानी चाहिए।"
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