दिवाला संहिता के तहत एक साल तक नयी कार्रवापई नहीं, गैर रणनीतिक उपक्रमों के निजीकरण की घोषणा

घरों को लौट रहे प्रवासी मजदूरों को रोजगार के लिए मनरेगा के तहत 40,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आवंटन किया गया है। केंद्र ने राज्यों की बाजार से कर्ज लेने की सीमा भी सकल राज्य-घरेलू उत्पाद के तीन प्रतिशत से बढा कर से बढ़ा कर पांच प्रतिशत कर दी है ताकि वे चालू वित्त वर्ष में अतरिक्त संसाधन जुटा सकें।

जमात

नयी दिल्ली, 17 मई सरकार ने कोविड-19 संकट के बीच गैर-रणनीतिक क्षेत्रों के सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण करने की घोषणा की है। इसके अलावा उद्योग को राहत के लिए कर्ज चूक के नए मामलों में दिवाला कार्रवाई पर एक साल के लिए रोक लगा दी है।

घरों को लौट रहे प्रवासी मजदूरों को रोजगार के लिए मनरेगा के तहत 40,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आवंटन किया गया है। केंद्र ने राज्यों की बाजार से कर्ज लेने की सीमा भी सकल राज्य-घरेलू उत्पाद के तीन प्रतिशत से बढा कर से बढ़ा कर पांच प्रतिशत कर दी है ताकि वे चालू वित्त वर्ष में अतरिक्त संसाधन जुटा सकें।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को आर्थिक पैकेज की पांचवीं किस्त की घोषणा की। रिजर्व बैंक द्वारा किए गए तरलता उपायों के साथ अब इस पैकेज का आकार करीब 21 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

हालांकि, इसमें से 10 प्रतिशत से भी कम सरकारी खजाने से जाएगा।

वित्त मंत्री ने कोरोना वायरस की वजह से अपने राज्यों को लौटे श्रमिकों को रोजगार के लिए ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना मनरेगा के तहत 40,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आवंटन किया है। यह बजट में आवंटित 61,000 करोड़ रुपये की राशि के अतिरिक्त है।

उन्होंने कहा कि इससे कुल मिलाकर 300 करोड़ दिहाड़ियों के बराबर रोजगार का सृजन होगा। इसके अलावा उन्होंने कोविड-19 की वजह से संकट झेल रहे उद्योग को राहत के लिए दिवाला कार्रवाई शुरू करने के लिए कर्ज चूक या डिफॉल्ट की सीमा भी बढ़ाने की घोषणा की ।

इसके साथ ही सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों के लिए नई नीति लाने की घोषणा की है। इसके तहत गैर-रणनीतिक क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण किया जाएगा। वहीं चिह्नित रणनीतिक क्षेत्रों में चार से अधिक कंपनियों को परिचालन की अनुमति नहीं होगी। इस सीमा से अधिक कंपनियों होने पर उनका आपस में विलय किया जाएगा।

वित्त मंत्री ने कहा कि जिन क्षेत्रों में जनहित में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) की मौजूदगी की जरूरत है, उन्हें अधिसूचित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि रणनीतिक क्षेत्रों में कम से कम एक सार्वजनिक उपक्रम होगा। इसमें निजी क्षेत्र को भी अनुमति होगी। वहीं अन्य क्षेत्रों में सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण किया जाएगा।

सीतारमण ने कहा कि पूर्व में 26 मार्च को दिए गए पैकेज और ताजा आर्थिक पैकेज की पांच किस्तों के साथ कुल पैकेज 20.97 लाख करोड़ रुपये का हो गया है। इसमें गरीबों को खाद्यान्न और मुफ्त रसाई गैस के अलावा उनके खातों में तीन माह तक नकदी का स्थानांतरण शामिल है। साथ ही इसमें रिजर्व बैंक द्वारा मार्च से किए गए 8.01 लाख करोड़ रुपये की तरलता के उपाय भी शामिल हैं।

हालांकि, वित्त मंत्री ने यह नहीं बताया कि इसमें सरकार को कितना अतिरिक्त खर्च करना होगा। लेकिन विश्लेषकों का कहा है कि 26 मार्च की घोषणा प्रवासी श्रमिकों को मुफ्त खाद्यान्न, मनरेगा के लिए आवंटन वृद्धि तथा कोरोना वायरस से निपटने को स्वास्थ्य क्षेत्र को 15,000 करोड़ रुपये के आवंटन को जोड़ने के बाद यह राशि 2.10 लाख करोड़ रुपये से अधिक नहीं बैठेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोरोना वायरस संकट से उबरने के लिए कुल 20 लाख करोड़ रुपये खर्च करने की घोषणा की थी। यह 2019-20 के देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के बराबर है। इस तरह कोविड-19 संकट में राहत पैकेज देने में जापान, अमेरिका, स्वीडन, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी के बाद भारत का नंबर आता है।

मौजूदा आर्थिक संकट को 1930 के दशक की महामंदी के बाद का सबसे बड़ा संकट माना जा रहा है। दुनियाभर के देशों द्वारा घोषित पैकेज को ‘कोरोना वायरस प्रोत्साहन पैकेज’ का नाम दिया है। डॉलर मूल्य में सबसे बड़ा पैकेज अमेरिका का 2,700 अरब डॉलर का है।

आर्थिक पैकेज की पांचवीं किस्त की घोषणा करते हुए सीतारमण ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के कारण कर्ज की किस्तें चुकाने में अपने को असमर्थ पा रही कंपनियों पर एक साल तक दिवाला कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत एक साल तक कोई नई दिवाला कार्रवाई शुरू नहीं होगी।

वित्त मंत्री ने कहा कि इसके साथ ही, कोरोनो वायरस से संबंधित ऋण को डिफ़ॉल्ट या चूक की परि से बाहर रखा जाएगा।

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