देश की खबरें | एनएमपी लोगों की आंखों में धूल झोंकने के लिए : अश्विनी कुमार
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अश्विनी कुमार ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि केंद्र की राष्ट्रीय मौद्रिकरण पाइपलाइन (एनएमपी) नीति गलत ढंग से तैयार की गयी है और इसका मकसद महंगाई, बेरोजगारी जैसे राष्ट्रीय मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाना है।
चेन्नई, दो सितंबर पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अश्विनी कुमार ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि केंद्र की राष्ट्रीय मौद्रिकरण पाइपलाइन (एनएमपी) नीति गलत ढंग से तैयार की गयी है और इसका मकसद महंगाई, बेरोजगारी जैसे राष्ट्रीय मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाना है।
उन्होंने इस नीति को "क्रूर मजाक" करार देते हुए कहा कि एनएमपी "वस्तुतः करदाताओं द्वारा वित्तपोषित संपत्ति का कुछ एक व्यापारिक समूहों को हस्तांतरण है।" कुमार ने कहा, "इससे अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण क्षेत्रों की आर्थिक शक्ति कुछ एक हाथों में केंद्रित होगी वहीं मूल्य स्थायित्व भी प्रभावित होगा।’’
कुमार ने यहां पार्टी के राज्य मुख्यालय सत्यमूर्ति भवन में पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि देश को यह कहते हुए कि बुनियादी ढांचे में 100 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा, केंद्र छह लाख करोड़ रुपये की राष्ट्रीय संपत्ति हटाने का प्रयास कर रहा है
उन्होंने कहा, "यह कैसे संभव है, किसी भी तरह, अगर कोई गणितीय सूत्र लागू किया जाए... चार साल की अवधि में 6 लाख करोड़ रुपये के संग्रह के जरिए 100 लाख करोड़ रुपये का वित्तपोषण? यह देश के लोगों के साथ क्रूर मजाक है।"
उन्होंने कहा कि एनएमपी "राष्ट्र की कीमत पर कुछ चुनिंदा लोगों के पक्ष में एक तंत्र को वैध बनाने" का प्रयास दिखता है। उन्होंने कहा, "... एनएमपी भारत के सामने मौजूद वास्तविक मुद्दों, खासकर महंगाई, बेरोजगारी, कुप्रबंधन आदि से लोगों का ध्यान भटकाने का एक दुर्भावनापूर्ण प्रयास है।"
कुमार ने कहा कि यह नीति प्रभावी रूप से नौकरी की असुरक्षा का कारण बन सकती है और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) आदि के लिए नौकरियों में आरक्षण की नीति को नाकाम कर सकती है।
उन्होंने आरोप लगाया, "आप निजी क्षेत्र से बिना मुनाफे के निवेश की उम्मीद नहीं कर सकते हैं... एनएमपी राष्ट्रीय संपत्ति के लिए ‘क्लीयरेंस सेल’ है।’’ उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के विपरीत, कांग्रेस नीत संप्रग सरकार ने केवल उन सार्वजनिक उपक्रमों का विनिवेश किया जो लंबे समय से घाटे में चल रहे थे या बाजार में उनकी हिस्सेदारी बहुत कम थी तथा वह रणनीतिक संपत्ति बेचने के लिए कभी भी सहमत नहीं थी।
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