देश की खबरें | नीतीश कटारा हत्याकांड : दोषी की सजा माफी पर फैसला नहीं लेने के लिए अवमानना नोटिस
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नयी दिल्ली, 17 मार्च उच्चतम न्यायालय ने 2002 के नीतीश कटारा हत्याकांड के एक दोषी की सजा माफी वाली अर्जी पर फैसला नहीं करने को लेकर सोमवार को दिल्ली सरकार के गृह विभाग के प्रधान सचिव को अवमानना नोटिस जारी किया।
शीर्ष अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि जब तक कठोर कदम नहीं उठाए जाते, तब तक उसके आदेशों का पालन नहीं किया जाता है।
न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि जब तक अवमानना नोटिस जारी नहीं किया जाता, तब तक हमारे आदेशों का पालन नहीं किया जाता है।’’
पीठ ने यह टिप्पणी तब की जब दिल्ली सरकार सुखदेव यादव उर्फ पहलवान की सजा माफी के संबंध में कोई निर्णय लेने में विफल रही। पहलवान इस मामले में बिना किसी छूट के 20 साल की जेल की सजा काट रहा है।
अपने पिछले आदेश का हवाला देते हुए पीठ ने कहा, ‘‘राज्य सरकार के निर्देशों पर एक गंभीर बयान आदेश में दर्ज किया गया था। अब हमें सूचित किया गया है कि एसआरबी (सजा समीक्षा बोर्ड) को आज याचिकाकर्ता के मामले पर विचार करना है। राज्य सरकार ने समय सीमा के विस्तार के लिए याचिका भी नहीं दाखिल की।’’
पीठ ने कहा, ‘‘इसलिए हम दिल्ली सरकार के गृह विभाग के प्रमुख सचिव को नोटिस जारी करते हैं और उनसे कारण बताने को कहते हैं कि क्यों न उनके खिलाफ न्यायालय की अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत कार्रवाई शुरू की जाए।’’
अवमानना नोटिस पर 28 मार्च तक जवाब दाखिल करना होगा। अधिकारी को अगली सुनवाई पर वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये उपस्थित रहने को कहा गया।
तीन मार्च को दिल्ली सरकार ने पीठ को सूचित किया था कि वह दोषी की सजा माफी पर दो सप्ताह में निर्णय लेगी।
सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे ने कहा कि एसआरबी की बैठक निर्धारित है और उन्होंने छूट पर निर्णय के लिए और समय मांगा।
न्यायमूर्ति ओका ने कहा, ‘‘हमने देखा है कि दिल्ली सरकार बिना समय बढ़ाए कोई निर्णय नहीं लेती...हम हर मामले में ऐसा देख रहे हैं। पहले यह बहाना बनाया जाता था कि मुख्यमंत्री उपलब्ध नहीं हैं।’’
जब अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने फिर से अनुरोध किया तो न्यायाधीश ने कहा, ‘‘आपने समय सीमा बढ़ाने के लिए अर्जी दाखिल करने की शिष्टता भी नहीं दिखाई है।’’
सरकार ने दोषी की सजा माफी याचिका की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता, मृतक की मां नीलम कटारा के पहलू पर दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देश का हवाला दिया।
न्यायमूर्ति ओका ने कहा, ‘‘जब तक अवमानना का खतरा न हो, आप कभी भी किसी मामले पर फैसला नहीं सुनाएंगे।’’
यह सूचित किए जाने पर कि एसआरबी की बैठक आज हो रही है, न्यायमूर्ति ओका ने कहा, ‘‘अब यह (अर्जी) मुख्यमंत्री के पास जाएगी और फिर राज्यपाल के पास जाएगी। कृपया हमें बताएं कि इस विभाग का प्रभारी कौन है। हम अवमानना नोटिस जारी करेंगे।’’
अवमानना नोटिस जारी करते हुए पीठ ने कहा कि उसने सरकार को सजा में छूट वाली अर्जी पर निर्णय लेने के बारे में बयान देने के लिए बाध्य नहीं किया है।
इससे पहले, पीठ ने सरकार से पूछा था कि दोषी, जिसकी 20 साल की जेल की अवधि 10 मार्च 2025 को समाप्त हो रही है, वह जेल में कैसे रहेगा।
तीन अक्टूबर 2016 को उच्चतम न्यायालय ने विकास यादव और उसके चचेरे भाई विशाल को कटारा अपहरण और हत्या मामले में उनकी भूमिका के लिए 25-25 साल की जेल की सजा सुनाई थी। सह-दोषी सुखदेव यादव उर्फ पहलवान को इस मामले में 20 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी।
तीनों को 16-17 फरवरी, 2002 की मध्य रात्रि को एक विवाह समारोह से कटारा का अपहरण करने और फिर विकास की बहन भारती यादव के साथ उसके कथित संबंध के कारण उसकी हत्या करने का दोषी ठहराया गया और सजा सुनाई गई। जिस समय यह घटना हुई थी, भारती के पिता डीपी यादव उत्तर प्रदेश के प्रभावशाली नेता थे।
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