देश की खबरें | अवैध खनन मामले में आदेश के उल्लंघन पर एनजीटी की देहरादून के डीएम को आपराधिक कार्रवाई की चेतावनी
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उत्तराखंड के ऋषिकेश में कथित अवैध खनन से संबंधित मामले की सुनवाई करते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने देहरादून के जिलाधिकारी को अपने एक आदेश का उल्लंघन करने पर संभावित आपराधिक कार्रवाई की चेतावनी दी है।
नयी दिल्ली, 17 अक्टूबर उत्तराखंड के ऋषिकेश में कथित अवैध खनन से संबंधित मामले की सुनवाई करते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने देहरादून के जिलाधिकारी को अपने एक आदेश का उल्लंघन करने पर संभावित आपराधिक कार्रवाई की चेतावनी दी है।
अधिकारी के आचरण की निंदा करते हुए एनजीटी ने कहा कि जिलाधिकारी ने स्वयं मौके पर जाकर रिपोर्ट दाखिल करने के बजाय जिले के उपजिलाधिकारी को यह काम सौंप दिया।
एनजीटी ऋषिकेश में त्रिवेणीघाट, नावघाट, दत्तात्रेय घाट, सूर्यघाट और मायाकुंड में गंगा नदी के किनारे एक ठेकेदार द्वारा कथित अवैध खनन के संबंध में एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि स्थानीय प्राधिकारियों ने घाटों में जमा कीचड़ या गाद को हटाने के लिए ठेकेदार आकाश जैन के साथ अनुबंध किया था, लेकिन जैन गाद हटाने की आड़ में “अवैध” खनन कर रहा था, जिससे क्षेत्र में नदी की पारिस्थितिकी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था।
पिछले महीने न्यायाधिकरण ने तथ्यों की पुष्टि करने और तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए देहरादून के जिलाधिकारी, उत्तराखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूकेपीसीबी) के अधिकारियों और राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) के एक प्रतिनिधि की एक संयुक्त समिति गठित की थी।
बुधवार को पारित आदेश में न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की एनजीटी की पीठ ने कहा कि जिलाधिकारी ने समिति की रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है।
रिपोर्ट पर गौर करते हुए पीठ ने कहा, “इस न्यायाधिकरण द्वारा गठित संयुक्त समिति में जिलाधिकारी द्वारा परिवर्तन किया गया...डीएम के स्थान पर, देहरादून के उपजिलाधिकारी को मौके पर जाकर रिपोर्ट जमा करने के लिए समिति का सदस्य बनाया गया है।”
इसमें कहा गया, “डीएम की ओर से यह कार्रवाई पूरी तरह से अवैध, अनधिकृत और उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। यह न्यायाधिकरण के आदेश का उल्लंघन है और एनजीटी अधिनियम, 2010 की धारा 26 के तहत अपराध है जिसके लिए संबंधित जिलाधिकारी के खिलाफ उचित आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है।”
धारा 26 न्यायाधिकरण के आदेशों, निर्णयों या पुरस्कारों का पालन न करने पर दंड से संबंधित है।
न्यायाधिकरण ने यह भी कहा कि रिपोर्ट के अनुसार जैन को त्रिवेणी घाट के पास “रेत हटाने” की अनुमति दी गयी थी।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)