देश की खबरें | एनजीटी पैनल ने मसूरी में पर्यटकों की संख्या सीमित करने की सिफारिश की

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. मसूरी की वहन क्षमता का अध्ययन करने के लिए राष्ट्रीय हरित अभिकरण (एनजीटी) द्वारा नियुक्त पैनल ने पहाड़ों की रानी आने वाले पर्यटकों पर शुल्क लगाकर उनकी संख्या को नियंत्रित करने तथा उस एकत्रित धन से शहर में कूड़ा तथा सफाई व्यवस्था का प्रबंधन करने की सिफारिश की है।

देहरादून, 28 जुलाई मसूरी की वहन क्षमता का अध्ययन करने के लिए राष्ट्रीय हरित अभिकरण (एनजीटी) द्वारा नियुक्त पैनल ने पहाड़ों की रानी आने वाले पर्यटकों पर शुल्क लगाकर उनकी संख्या को नियंत्रित करने तथा उस एकत्रित धन से शहर में कूड़ा तथा सफाई व्यवस्था का प्रबंधन करने की सिफारिश की है।

साल की शुरूआत में जोशीमठ में आए भूधंसाव के संकट को मसूरी के लिए चेतावनी बताने वाली एक खबर के मद्देनजर राष्ट्रीय हरित अभिकरण (एनजीटी) ने मसूरी की वहन क्षमता का अध्ययन करने के लिए इस पैनल का गठन किया था। इस पैनल ने हाल ही में अपनी रिपोर्ट एनजीटी को सौंपीं जिसमें कई उपाय सुझाए गए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है, "क्षेत्र की वहन क्षमता, खासकर पार्किंग और अतिथि गृहों की उपलब्धता को देखते हुए पर्यटकों का पंजीकरण किया जाना चाहिए। मसूरी घूमने के लिए पर्यटकों से शुल्क लिया जा सकता है और उस धन का इस्तेमाल कूड़े और सफाई के प्रबंधन के लिए किया जा सकता है।"

मसूरी को उत्तराखंड में सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल बताते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि 2000 से पहाड़ों की रानी में आने वाले पर्यटकों की संख्या में लगातार इजाफा होता जा रहा है और 2022 में यहां अप्रत्याशित रूप से 1,17,389 सैलानी पहुंचे।

रिपोर्ट के अनुसार, पर्यटकों की भारी आमद अनियमित निर्माण, अत्यधिक अपशिष्ट उत्पादन, स्वच्छता और सीवेज समस्याओं, पानी की कमी, भीड़भाड़ वाली सड़कों, यातायात की भीड़ और वाहन प्रदूषण जैसे मुद्दों को और बढ़ा देती है।

गढ़वाल हिमालय की तलहटी पर स्थित मसूरी भूकंप की दृष्टि से जोन चार में आता है और इस दृष्टि से रिपोर्ट में उसे जोशीमठ के रास्ते पर जाने से बचाने के लिए कई एहतियाती और उपचारात्मक कदम उठाने का सुझाव दिया गया है।

मसूरी में वर्षों से अनियोजित और अस्त-व्यस्त बुनियादी ढांचा विकास का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि यहां सुरंग तथा होटल और अस्पताल जैसे अन्य बड़े निर्माण की अनुमति दिए जाने से पहले विस्तृत इंजीनियरिंग, भूवैज्ञानिक और भूतकनीकी जांच/अध्ययन की जानी चाहिए।

रिपोर्ट में मौजूदा इमारतों की जांच और संरचनाओं की रिट्रोफिटिंग को मजबूत करने की सिफारिश भी की गयी है जिससे उन्हें फिसलने या ढहने के संभावित नुकसान से बचाया जा सके।

भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में पहाड़ों के नीचे से बोल्डर न हटाने और ढलानों पर दिखने वाली दरारों को भरने का सुझाव भी रिपोर्ट में दिया गया है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

संबंधित खबरें

T20 World Cup 2026 Semi Final Schedule: वेस्टइंडीज को हराकर सेमीफाइनल में भारत, 5 मार्च को वानखेड़े में इंग्लैंड से भिड़ंत; यहां देखें पूरा शेड्यूल

India vs West Indies, 52nd Match Scorecard: रोमांचक मुकाबले में वेस्टइंडीज ने टीम इंडिया को 5 विकेट से हराकर सेमीफाइनल में बनाई जगह, संजू सैमसन ने खेली धमाकेदार पारी; यहां देखें IND बनाम WI मैच का स्कोरकार्ड

Australia Women vs India Women, 3rd ODI Match Video Highlights: होबार्ट में ऑस्ट्रेलिया ने टीम इंडिया को 185 रनों से रौंदा, सीरीज में 3-0 से किया क्लीन स्वीप; यहां देखें AUS W बनाम IND W मैच का वीडियो हाइलाइट्स

India vs West Indies, 52nd Match Scorecard: कोलकाता में वेस्टइंडीज ने टीम इंडिया के सामने रखा 196 रनों का टारगेट, रोवमैन पॉवेल और जेसन होल्डर ने खेली धमाकेदार पारी; यहां देखें पहली पारी का स्कोरकार्ड

\