देश की खबरें | एनजीटी ने एस्बेस्टस के संपर्क में आने वाले कर्मियों के लिए पीपीई उपलब्ध कराने के निर्देश दिये

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नयी दिल्ली, 18 जुलाई राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को देश भर में एस्बेस्टस आधारित उद्योगों के लिए उचित दिशानिर्देश जारी करने का निर्देश दिया है, जिसमें रोग पैदा करने वाले फाइबर के संपर्क में आने वाले कर्मियों द्वारा व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) का अनिवार्य उपयोग शामिल है।

एस्बेस्टस के संपर्क में आने से फेफड़ों को नुकसान पहुंच सकता है।

एनजीटी ने सीपीसीबी से मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर एस्बेस्टस के जोखिम के प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के लिए उसके द्वारा सुझाए गए कुछ उपायों का पालन करने के लिए भी कहा।

एनजीटी एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें ‘यूपी एस्बेस्टस लिमिटेड’ कंपनी की वजह से उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले के बिसहाड़ा गांव में पर्यावरण के प्रदूषित होने का दावा किया गया है।

यह रेखांकित करते हुए कि एस्बेस्टस के संपर्क में आने का कोई सुरक्षित स्तर नहीं है, न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने परियोजना प्रस्तावक (पीपी) या निजी कंपनियों को लोगों को एस्बेस्टस के सपंर्क में आने पर होने वाले खतरों से बचाने के लिए कुछ उपाय लागू करने का निर्देश दिया।

पीठ ने कहा कि एस्बेस्टस के संपर्क में आना ‘‘फेफड़ों की घातक बीमारियों’’ के लिए एक जोखिम कारक है, जैसे कि फेफड़ों का कैंसर और फेफड़ों के ऊतकों पर घाव।

इसने कहा, ‘‘कर्मचारियों के लिए व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) का उचित उपयोग अनिवार्य किया जाना चाहिए।’’

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