देश की खबरें | एनजीटी ने एनटीपीसी, विंध्याचल को फ्लाई ऐश डाइक में दरार पर 10 करोड़ रू का जुर्माना देने को कहा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सिंगरौली में एनटीपीसी विंध्याचल सुपर थर्मल पावर स्टेशन को उसके फ्लाई ऐश डाइक (राख के लिये बनाया गया बांध) में दरार से गोविंद वल्लभ पंत सागर “रिहंद जलाशय” में राख गिरने से हुए नुकसान पर अंतरिम मुआवजे के तौर पर 10 करोड़ रुपये देने के निर्देश दिये हैं।
नयी दिल्ली, 16 जुलाई राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सिंगरौली में एनटीपीसी विंध्याचल सुपर थर्मल पावर स्टेशन को उसके फ्लाई ऐश डाइक (राख के लिये बनाया गया बांध) में दरार से गोविंद वल्लभ पंत सागर “रिहंद जलाशय” में राख गिरने से हुए नुकसान पर अंतरिम मुआवजे के तौर पर 10 करोड़ रुपये देने के निर्देश दिये हैं।
एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि फ्लाई ऐश (थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली राख) का निस्तारण पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के तहत वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा सांविधिक तौर पर अधिसूचित तरीके से हो, जिसमें 100 प्रतिशत उपयोग की आवश्यकता है।
अधिवक्ता अश्विनी कुमार दुबे की याचिका पर अधिकरण ने यह निर्देश दिये। दुबे ने याचिका में 6 अक्टूबर 2019 को हुई उस घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि एनटीपीसी विद्युत परियोजना के “लापरवाही भरे कृत्य” के कारण राख के बांध में दरार आई जिससे 35 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा फ्लाई ऐश गोविंद वल्लभ पंत सागर “रिहंद जलाशय” में गिरी।
एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल ने कहा कि खदानों में राख का निस्तारण और परित्यक्त खानों में राख को पुन: भरने का काम सीपीसीबी के दिशानिर्देश के मुताबिक किया जा सकता है या धनबाद स्थित भारतीय खान ब्यूरो से भी इस विषय पर परामर्श लिया जा सकता है।
अधिकरण ने एक समिति द्वारा दायर रिपोर्ट को बरकरार रखा और संयंत्र के उस दावे को खारिज कर दिया कि समिति की रिपोर्ट “त्रुटिपूर्ण और निराधार” है।
अधिकरण ने कहा, “एनटीपीसी, विंध्याचल समिति की अनुशंसा के मुताबिक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास अंतरिम मुआवजे के तौर पर 10 करोड़ रुपया जमा करा सकता है, जिसमें से पहले जमा राशि वह काट ले। संयंत्र के चारों तरफ आरसीसी की एक दीवार भी बनाई जा सकती है।”
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