जरुरी जानकारी | एनजीटी ने एनटीपीसी को पर्यावरण नुकसान की भरपाई के लिये 58 लाख रुपये देने को कहा

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नयी दिल्ली, 23 फरवरी राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली उत्पादक कंपनी एनटीपीसी की उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) के आदेश के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी है। याचिका में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के एवज में 57.96 लाख रुपये के लगाये गये जुर्माना आदेश की समीक्षा का आग्रह किया गया था।

जांच में सार्वजनिक उपक्रम को कीचड़ यानी गंदगी निपटान से जुड़े स्थल रखरखाव नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया गया। इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचा।

एनजीटी चेयरपर्सन न्यायाधीश आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने एनटीपीसी लि. की राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेश के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी।

पीठ ने इस बात पर गौर किया कि कंपनी की चमोली में तपोवन विष्णुगढ़ पनबिजली परियोजना स्थल के पास जो कीचड़ और गंदगी थी, वह नुकसानदायक थी और निर्धारित मानदंडों के अनुरूप इसका रखरखाव नहीं किया गया जिससे क्षरण को खतरा था।

पीठ ने कहा, ‘‘कीचड़ डाले जाने वाले जगह खड्ड के रूप में क्षरण साफ देखा गया। अत: इससे साफ है कि पर्यावरण और वन मंत्रालय ने कीचड़ निपटान स्थल पर जो नियम तय किये हैं, उसके अनुसार उसका रखरखाव नहीं किया जा रहा था।’’

एनजीटी ने कहा, ‘‘इसको देखते हुए अपील में कोई दम नजर नहीं आता। पर्यावरण को जो नुकसान पहुंचा है, उसको देखते हुए पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले को उसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा और इसी सिद्धांत का इस मामले में अनुपालन किया गया है। अत: अपील को खारिज किया जाता है। जो राशि वसूली जाएगी, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर्यावरण को पूर्व स्तर पर लाने में उसका उपयोग कर सकता है।’’

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जल (प्रदूषण रोकथाम और नियंत्रण) कानून, 1974 की धारा 33ए के तहत आदेश दिया था। इसके तहत अपीलकर्ता एनटीपीसी को पर्यावरण को फिर से पूर्व स्तर पर लाने के लिये 57,96,000 रुपये का जुर्माना लगाया।

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