देश की खबरें | महाराष्ट्र में बाघ गलियारों में एनटीसीए की योजना के अनुपालन बिना नयी सड़कें नहीं बन सकतीं: एनजीटी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कहा है कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की कार्ययोजना के अनुपालन के बिना महाराष्ट्र में नयी सड़क परियोजनाओं पर आगे नहीं बढ़ सकता।

नयी दिल्ली, नौ जुलाई राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कहा है कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की कार्ययोजना के अनुपालन के बिना महाराष्ट्र में नयी सड़क परियोजनाओं पर आगे नहीं बढ़ सकता।

एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वन्यजीवन के प्रभावित होने की आशंका के चलते सावधानी के तौर पर एनटीसीए की कार्ययोजना का अनुपालन आवश्यक है।

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अधिकरण ने उन खबरों का संज्ञान लिया जिनमें महाराष्ट्र में नयी सड़क परियोजनाओं से बाघ गलियारों के लिए बाधा उत्पन्न होने का दावा किया गया था।

खबरों में कहा गया था कि इस तरह की सड़क परियोजनाओं में पर्यावरण औ वन्यजीवन की रक्षा के लिए आवश्यक कदमों तथा सावधानियों की कमी है।

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परियोजना खर्च के मुद्दे पर अधिकरण ने कहा कि वित्तपोषण के स्रोत पर एनजीटी को टिप्पणी नहीं करेगा और यह सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा महाराष्ट्र सरकार के बीच का विषय है।

मंत्रालय ने पर्यावरण और वन्यजीवन को होने वाले नुकसान को कम करने संबंधी प्रस्तावित कार्य पर 100.81 करोड़ रुपये से अधिक का कोई अतिरिक्त व्यय करने में असमर्थता जताई है जिस पर पूर्व में सहमति बनी थी। इसने महाराष्ट्र सरकार और मुख्य वन्यजीव वार्डन से आग्रह किया था कि वे दो सड़कों-मुल-चंद्रपुर और बामनी-नवेगांव के संबंध में पर्यावरण और वन्यजीवन को होने वाले नुकसान को कम करने संबंधी प्रस्तावित कार्य पर अतिरिक्त व्यय करें।

वन (बाघ परियोजना) एनटीसीए के अतिरिक्त महानिदेशक की ओर से दायर संशोधित कार्ययोजना पर विचार करते हुए एनजीटी ने उल्लेख किया कि मंत्रालय दोनों सड़कों के संबंध में फिर से सहमत नहीं हुआ है।

एनजीटी ने कहा, ‘‘जैसा कि अधिकरण पहले ही कह चुका है कि मंत्रालय एनटीसीए द्वारा तैयार की गई कार्ययोजना के अनुपालन के बिना परियोजना पर आगे नहीं बढ़ सकता जो वन्यजीवन को संभावित खतरे के मद्देनजर एहतियात के तौर पर आवश्यक है।’’

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