विदेश की खबरें | नेपाल सरकार व माओवादी विद्रोहियों ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए

काठमांडू, पांच मार्च नेपाल के कट्टरपंथी माओवादी समूह के नेता नेत्र विक्रम चंद ने शुक्रवार को कहा कि उनके प्रतिबंधित संगठन और सरकार के बीच हुए शांति समझौते के लिए वह प्रतिबद्ध हैं। इस समझौते का मकसद विद्रोहियों द्वारा की जाने वाली हिंसा, जबरन वसूली आदि को समाप्त करना है।

विद्रोही नेता नेत्र विक्रम चंद को विप्लव नाम से भी जाना जाता है। वह पिछले दो साल में पहली बार शुक्रवार को सामने आए। इससे पहले सरकार ने उनके समूह नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी - विप्लव पर लगे प्रतिबंध को हटा लिया ताकि वह शांति समझौते पर हस्ताक्षर में शामिल हो सके।

चंद ने कहा, "मैं हर किसी को आश्वस्त करना चाहता हूं कि सरकार के साथ हुए समझौते का हम पालन करेंगे।" वह यहां समझौते पर हस्ताक्षर के लिए आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे।

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली और गृह मंत्री राम बहादुर थापा ने भी भाग लिया।

दोनों पक्ष बृहस्पतिवार को शांति समझौते के लिए सहमत हुए थे। सरकार ने शांति वार्ता के बाद कहा था कि उसने समूह से प्रतिबंध हटाने, जेल में बंद उसकी पार्टी के सभी सदस्यों एवं समर्थकों को रिहा करने और उनके खिलाफ सभी कानूनी मामले वापस लेने पर सहमति जताई है। वहीं समूह ने हिंसा का त्याग करने और सभी राजनीतिक मसलों को शांतिपूर्ण वार्ता के जरिए सुलझाने पर सहमति व्यक्त की है।

प्रधानमंत्री ओली ने समारोह के दौरान कहा, “नेपाल शांति के एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। नेपाल में अब कोई हिंसा या हिंसक टकराव बाकी नहीं रह गया है।’’

नेपाल सरकार ने मार्च 2019 में सीपीएन-बिप्लव की गतिविधियों पर उस समय प्रतिबंध लगा दिया था जब पार्टी ने काठमांडू में दो विस्फोट किए थे। उस घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।

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