देश की खबरें | सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के लिए तय अधिकतम उम्र पर पुनर्विचार की जरूरत : अदालत
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केरल उच्च न्यायालय ने कहा है कि परिवार बनाने की व्यक्तिगत पसंद मूलभूत अधिकार है और इसके लिए अधिकतम उम्र तय करना एक पाबंदी है, जिसपर पुनर्विचार की जरूरत है।
कोच्चि, चार जनवरी केरल उच्च न्यायालय ने कहा है कि परिवार बनाने की व्यक्तिगत पसंद मूलभूत अधिकार है और इसके लिए अधिकतम उम्र तय करना एक पाबंदी है, जिसपर पुनर्विचार की जरूरत है।
उच्च न्यायालय ने ‘सहायक जननीय प्रौद्योगिकी और सरोगेसी बोर्ड’ को निर्देश दिया कि वह केंद्र सरकार को प्रजनन प्रौद्योगिकी की सहायता प्राप्त करने के लिए तय अधिकतम उम्र संबंधी पाबंदियों पर पुनर्विचार करने के लिए कहे।
न्यायमूर्ति वी.जी. अरुण ने कहा कि परिवर्ती (ट्रांजिशनल) प्रावधान के बिना उम्र संबंधी पाबंदी लगाना ‘अतार्किक और मनमाना’ है। अदालत ने साथ ही यह भी कहा कि यह मानना भी मुश्किल है कि अधिकतम आयु के निर्धारण का आदेश इतना अतिशय और मनमाना है, जिसकी वजह से न्यायिक हस्तक्षेप की जरूरत है।
अदालत ने कहा, ‘‘उपरोक्त सिद्धांतों में संतुलन स्थापित करते हुए मेरे लिए कहना मुश्किल है कि कानून की धारा-21(जी) में तय अधिकतम उम्र अतिशय और मनमाना है, जिसकी वजह से न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता हो। साथ ही, मैंने पाया कि परिवर्ती प्रावधान के बिना ऊपरी आयु सीमा का निर्धारण अतार्किक और मनमाना है।’’
अदालत ने कहा कि परिवार बढ़ाना व्यक्ति का मूलभूत अधिकार है और ऊपरी सीमा तय करके सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल को प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता है।
न्यायमूर्ति अरुण ने ‘सहायक जननीय प्रौद्योगिकी और सरोगेसी अधिनियम-2021’ को चुनौती देनी वाली याचिकाओं का 19 दिसम्बर को निस्तारण करते हुए यह फैसला सुनाया।
इन याचिकाओं में अधिनियम के उस प्रावधान को चुनौती दी गई थी, जिसमें सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम 2021 के इस्तेमाल के लिए महिलाओं की अधिकतम उम्र 50 साल और पुरुषों की अधिकतम उम्र 55 साल तय की गई है।
इस कानून को 25 जनवरी 2022 को लागू किया गया था।
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