जरुरी जानकारी | डब्ल्यूटीओ में ई-कॉमर्स शुल्क पर लगी रोक को परिभाषित करने की जरूरतः गोयल
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के सदस्यों को ई-कॉमर्स कारोबार पर सीमा शुल्क लगाने पर लगाई गई रोक को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने की जरूरत है।
नयी दिल्ली, 11 अप्रैल वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के सदस्यों को ई-कॉमर्स कारोबार पर सीमा शुल्क लगाने पर लगाई गई रोक को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि इस रोक को बढ़ाने से भारत जैसे देशों में डिजिटल व्यापार क्षेत्र में अपनी खुद के परिवेश के विकास पर प्रभाव पड़ रहा है।
डब्ल्यूटीओ के सदस्य देशों ने 1998 से ही इलेक्ट्रॉनिक ढंग से कारोबार पर सीमा शुल्क नहीं लगाने पर सहमति जताई थी। इस रोक को लगातार मंत्रिस्तरीय सम्मेलनों में समय-समय पर बढ़ाया जाता रहा है।
भारत ने बार-बार शुल्क स्थगन के दायरे पर चर्चा करने की जरूरत पर बल दिया है क्योंकि इसके राजस्व निहितार्थ हैं।
गोयल ने यहां एक कार्यक्रम में कहा, "हम इसके खिलाफ नहीं हैं। समस्या यह है कि पहले के आईटीए-1 (सूचना प्रौद्योगिकी समझौता) में यह ठीक से परिभाषित नहीं किया गया था कि आईटीए के अंतर्गत क्या आता है। इसके दायरे में अधिक वस्तुओं को लाने के लिए रोक बढ़ाई गई जिससे नुकसान हुआ या भारत जैसे देशों के लिए अपना स्वयं का परिवेश विकसित करने की क्षमता में कमी आई।"
उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि ई-कॉमर्स शुल्क पर स्थगन को अच्छी तरह से परिभाषित करने की जरूरत है कि इसमें क्या शामिल होगा और क्या नहीं। लेकिन उससे अधिक इसमें कुछ भी शामिल नहीं किया जाएगा।"
वाणिज्य मंत्री ने कहा कि भारत ने हमेशा बहुपक्षीय संगठनों में विश्वास किया है और उनका समर्थन किया है।
उन्होंने कहा, "भारत व्यापार और व्यवसाय के वैश्विक नियमों के ढांचे के भीतर काम करना जारी रखेगा, लेकिन मुझे लगता है कि डब्ल्यूटीओ को भी कुछ क्षेत्रों में खुद को सुधारना होगा।"
इसके साथ ही गोयल ने स्पष्ट किया कि भारत चीन से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को प्रोत्साहित करने का इरादा नहीं रखता है।
उन्होंने भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों पर लगाए गए एफडीआई प्रतिबंधों में ढील देने की संभावना को खारिज करते हुए कहा कि चीन से अधिक एफडीआई नहीं आ रहा है और सरकार इसे बढ़ावा भी नहीं दे रही है।
इस पाबंदी के तहत चीन से आने वाले निवेश के लिए सरकार की पूर्व-अनुमति अनिवार्य है।
गोयल ने कहा कि भारत ऐसी विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ एकीकरण चाहता है जो निष्पक्ष व्यापार और ईमानदार गतिविधियों में विश्वास रखती हैं और जहां घरेलू उद्योगों को समान अवसर मिले।
प्रेम
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)