देश की खबरें | बाल संरक्षण तंत्र को मजबूत करने के लिए गैर सरकारी संगठनों ने बनाया राष्ट्रीय गठबंधन
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. बच्चों के शोषण पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए नागरिक संस्थाओं ने सोमवार को एक राष्ट्रीय गठबंधन की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य सुरक्षा तंत्र को मजबूत करना और बाल अधिकारों को लागू करना है।
नयी दिल्ली, 13 दिसंबर बच्चों के शोषण पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए नागरिक संस्थाओं ने सोमवार को एक राष्ट्रीय गठबंधन की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य सुरक्षा तंत्र को मजबूत करना और बाल अधिकारों को लागू करना है।
नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने यहां इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन फोरम (आईसीपीएफ) की शुरुआत की। भागीदारी करने वाले गैर सरकारी संगठनों के एक संयुक्त बयान के अनुसार, सामाजिक कार्यकर्ता और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के पूर्व अधिकारी आमोद कंठ को मंच का राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया है।
बाल तस्करी और यौन शोषण के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श करने के लिए ‘कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रन फाउंडेशन’ ने चार दिवसीय संगोष्ठी का भी आयोजन किया। विचार-विमर्श में प्रयास, शक्ति वाहिनी, बचपन बचाओ आंदोलन और प्रज्वला जैसे 70 से अधिक नागरिक संस्थाओं ने भाग लिया।
सत्यार्थी ने कहा, ‘‘आईसीपीएफ ने एक बड़े संकल्प, एक बड़ी प्रतिज्ञा की शुरुआत की है। मंच का गठन साझा दृढ़ संकल्प, सपनों और विचारों को पूरा करने के उद्देश्य से किया गया है।’’ उन्होंने कहा कि यह विभिन्न नागरिक संस्थाओं का एक गठबंधन है, जो बाल शोषण और बाल दासता को समाप्त करने के लिए काम करेगा।
सत्यार्थी ने कहा, ‘‘मंच बच्चों के प्रति सामाजिक सोच और नीतियों को बदलेगा और सामाजिक चेतना का प्रसार करेगा। मंच के माध्यम से हम एक ऐसे भारत के निर्माण की कोशिश करेंगे, जहां किसी भी तरह से किसी भी बच्चे का शोषण नहीं होगा।’’
आईसीपीएफ के उद्देश्यों को रेखांकित करते हुए कंठ ने कहा, ‘‘यह मंच हमारे देश में बुनियादी सुविधाओं से वंचित बच्चों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में काम करेगा।’’ कंठ ने कहा, ‘‘देश में ऐसे बच्चों की संख्या तीन करोड़ से ज्यादा है। हम कोशिश करेंगे कि जो बच्चे सामाजिक, आर्थिक विषमताओं के कारण स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, उनका स्कूलों में दाखिला करा दिया जाए।’’ पूर्व आईपीएस अधिकारी ने कहा कि मंच यह सुनिश्चित करेगा कि बच्चे किसी भी तरह के शोषण और प्रताड़ना से मुक्त हों।
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